ज़ख़्म से पीड़ित मनुजता
प्रो. आर.एन. सिंह ‘साहिल’
जौनपुर (उ.प्र.)
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भेड़िया भी आदमी को देखकर फ़रमा रहा
मांद से देखो निकल ये कौन बंदा आ रहा
देख इनकीं हरकतो को बाघ चीते दंग है
इनकी करतूतों से भस्मासुर भी है शरमा रहा
दिन दहाड़े मॉब लिंचिंग हो गया जैसे चलन
ख़ौफ़ नफ़रत ग़म का बादल है वतन में छा रहा
शांति भाईचारा मृग मरीचिका सा लगने लगा
आदमी को देखकर अब आदमी घबरा रहा
पीड़ितों को देखकर मुँह मोड़ लेता आदमी
विडियो लेकिन बनाकर ख़ुद का मन बहला रहा
ज़ख़्म से पीड़ित मनुजता घाव कैसे भर सके
वक़्त का मारा ये साहिल ज़ख़्म ख़ुद सहला रहा
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परिचय :- प्रोफ़ेसर आर.एन. सिंह ‘साहिल’
निवासी : जौनपुर उत्तर प्रदेश
सम्प्रति : मनोविज्ञान विभाग काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
रुचि : पुस्तक लेखन, सम्पादन, कविता, ग़ज़ल, १०० शोध पत्र प्रकाशित, मनोविज्ञान पर १२ पुस्तकें प्रकाशित, ११ क...

























