मनोव्यथा
मंजुला भूतड़ा
इंदौर म.प्र.
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न तुम घर से निकलना न हम,
दूर से देखकर ही मुस्कुराएंगे तुम-हम।
बहुत याद आएगा यह मंजर भी,
अजीब से रिश्ते कर दिए हालात ने।
फुरसत में तो हैं मानो सब,
पर मिलने का नहीं कोई सबब।
कुदरत का कहर झेल रहा इन्सान,
जोखिम उठाकर चिकित्सक निभाते अपना ईमान।
कुछ सिरफिरों को नहीं दिखता इनमें भगवान,
सफाईकर्मी, पुलिस वाले फिक्र में हैं,
बचाने निकले हैं हर जान।
कोरोना का भय है,सब सुरक्षित घर में,
नमन है उन कर्मवीरों को, जो लगे हैं बीमारी के दमन में।
परिचय :-
नाम : मंजुला भूतड़ा
जन्म : २२ जुलाई
शिक्षा : कला स्नातक
कार्यक्षेत्र : लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता
रचना कर्म : साहित्यिक
लेखन विधाएं : कविता, आलेख, ललित निबंध, लघुकथा, संस्मरण, व्यंग्य आदि सामयिक, सृजनात्मक एवं जागरूकतापूर्ण विषय, विशेष रहे। अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक समाचार पत्रों त...
























