सावन में भीगी मेरी गौशाला
श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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सावन की बारिश में भीगी गौशाला,
पीपल, नीम, बरगद की शाला,
झूमे हर जीव बन के मतवाला,
अद्भुत निराली, अनुपम गौशाला!!
उन्मुक्त पवन के झोंके निराले,
सारे जीव लगते है बड़े न्यारे!
रिमझिम बरखा की पड़ती फुहार,
नन्हें गौ वंशों की रूनझुन बयार!
सावन की सोंधी मिट्टी की खुशबु,
चूल्हे पर सेंकते भुट्टे की सुवास,
अभावों के बीच भी सौंदर्य है अपार
खुशियाँ बरसती यहाँ अपरम्पार!
हरी भरी खेतों की क्यारी निराली,
सावन की सोंधी खुशबु से फैली हरियाली!
गौशाला का जीवन है कितना पावन,
हर एक जीव में मिलता अपनापन!!
बरसती यहां सिर्फ करुणा और स्नेह,
यहाँ आके सबको मिलता है प्रेम!
माटी की जड़ में जहाँ बसते हैं रिश्ते,
देवी-देवता यहां हर रंग-रूप मे बसते!
परिचय :- श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
पति : श्री राकेश क...




















