फाल्गुनी हवा
ओमप्रकाश सिंह
चंपारण (बिहार)
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फाल्गुनी हवा के झोंकों से-
उड़ रहे हैं झर झर पत्ते।
उड़ रही है मिट्टी की धूल- कण-
जन जीवन में उमस जागे।
नस-नस मे फिर पौरूषता की-
आज महा प्रलय जागे ।
नवयुगल सब प्रेम गीत में-
सराबोर होकर सब नाचे।
ढोल, झाल, मंजीरे लेकर-
ठुमक-ठुमक कर सब नाचे।
पीते हैं कोई भंग-गंग-संग
झूम-झूम कर सब नाचे।
लिए हाथ में पिचकारी को-
घोल रंग को सब पर डालें।
लाल-पीली हरी रंगों में-
अंग-अंग रंग डाले।
फाल्गुनी हवा के झोंकों से-
उड़ रहे हैं झर-झर पत्ते।
आज न कोई राजा-रानी
सभी मस्ती में झूमे नाचे।
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परिचय :- ओमप्रकाश सिंह (शिक्षक मध्य विद्यालय रूपहारा)
ग्राम - गंगापीपर
जिला -पूर्वी चंपारण (बिहार)
सम्मान - हिंदी रक्षक मंच इंदौर (hindirakshak.com) द्वारा हिन्दी रक्षक २०२० सम्मान
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