होना था जो साथ मेरे हो गया
प्रमोद त्यागी (शाफिर मुज़फ़्फ़री)
(मुजफ्फरनगर)
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होना था जो साथ मेरे हो गया
क्या बतायें क्या मिला क्या खो गया
आज फिर दीया जला है कब्र पर
हो ना हो वो आज फिर से रो गया
भूखे बच्चे को सुनाकर लोरियां
माँ ने देखा रोते रोते सो गया
उम्र गुज़री पूरी तब आया समझ
आज तक आया नहीं है जो गया
हर तरफ काँटों का जंगल है यहाँ
कौन था जो बीज ऐसे बो गया
छिननें की ज़िद तो बस ज़िद रह गयी
जिसका जो उसको मुबारक हो गया
तुनें "शाफिर" जो किये मैले गुनाह
आँख का इक आँसू सब कुछ धो गया
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लेखक परिचय :- प्रमोद त्यागी (शाफिर मुज़फ़्फ़री)
ग्राम- सौंहजनी तगान
जिला- मुजफ्फरनगर
प्रदेश- उत्तरप्रदेश
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