आत्मदाह
डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय"
ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
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इस दुनियां में हर व्यक्ति
परेशान है।
आत्मदाह किसी भी
समस्या का समाधान नहीं है।
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आत्मदाह करने से हम
तो दुनियां छोड़कर चले जायेंगें।
पीछे घर वालों के लिये
हजारों समस्याएं छोड़ जायेंगे।
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दुनियां की प्रत्येक समस्या
का समाधान है।
आत्मदाह करना एक
कायराना काम है।
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८४ लाख योनियों के बाद
मानव जीवन मिलता है।
आत्मदाह करने से हमें
कुछ भी नहीं मिलता है।
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आत्मदाह से हमारी
समस्या सुलझ नहीं पायेगी।
उलटा वह
बिगड़ती जायेगी।
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समस्याएं तो जिंदगी
का हिस्सा है।
इनका डटकर सामना करें
आत्मदाह करना तो
बुजदिलों का किस्सा है।
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परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय"
निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलि...

















