बेटियां
गोविन्द सरावत मीणा "गोविमी"
बमोरी, गुना (मध्यप्रदेश)
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जमीं-ओ-आस्मां का प्यार हैं, बेटियां,
चांद-ओ-सूरज का निखार हैं, बेटियां !
कण-कण में व्यापत सांसों का दिगंत,
करती रहती सतत विस्तार हैं, बेटियां !!
सुख-ओ-दुःख की साथी हैं, बेटियां,
योग-ओ-वियोग भी पाती हैं, बेटियां !
जन्म से मृत्योपरान्त हैं अनेक रूप,
भार्या-बहिन ओ माँ कहाती हैं, बेटियां !!
अपने-ओ-पराये की प्रिय हैं, बेटियां
घर-आंगन की लाज व दिये हैं, बेटियां !
जाती जब लांघकर एक देहरी से दूजी
बाबुल की दुआओं को जिए हैं, बेटियां !!
सीता-ओ-राधा-सी निर्मल हैं, बेटियां,
अनुसूइया, सावित्री-सी प्रबल हैं, बेटियां !
कूद पड़े रणभूमि में, बनके दुर्गा-काली,
मीरा, संवरी-सी उज्जवल हैं, बेटियां !!
युगों-युगों से सृष्टि का श्रृंगार हैं, बेटियां,
धरती की हर हलचल-झंकार हैं, बेटियां !
मिट जाएगा भूमंडल, ब...















