मीठी बातें
संजय वर्मा "दॄष्टि"
मनावर (धार)
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गाँवों में नीदं
मीठी होती
बौराये आमों तले
कोयल की कूक भी
मीठी होती।
पत्तों से झांकती
सूरज की किरणें
तपिश को ठंडा कर देती
खेत से पुकारती
आवाजें
सुबह की बयार को
मीठा कर देती।
गोरी के
पनघट पे जाने से
पायल
कानों में मिठास घोल देती
बैलों की घंटियाँ
मीठी बातें कहती
लगता हो जैसे
नदियां इन्ही मिठास से
इठलाती बहती।
परिचय :- संजय वर्मा "दॄष्टि"
पिता :- श्री शांतीलालजी वर्मा
जन्म तिथि :- २ मई १९६२ (उज्जैन)
शिक्षा :- आय टी आय
व्यवसाय :- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग)
प्रकाशन :- देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ व समाचार पत्रों में निरंतर पत्र और रचनाओं का प्रकाशन, प्रकाशित काव्य कृति "दरवाजे पर दस्तक", खट्टे मीठे रिश्ते उपन्यास कनाडा-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व के ६५ रचनाकारों में लेखनीयता में सहभागिता भ...






















