मैं नारी हुँ
राजेन्द्र कुमार पाण्डेय 'राज'
बागबाहरा (छत्तीसगढ़)
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मैं नारी हुँ
मेरे अंदर भी एक नरम दिल है
एक प्यारा प्यारा सा एहसास है
मैंने भी कुछ सुनहरे ख्वाब देखा है
पंक्षियों की तरह आसमां में उड़ना चाहती हूँ
आज समाज में नारी सम्मान विडंबना है
पुरुष प्रधान समाज से नारी मन आहत है
आज नारी ही नारी के कारण सबसे असुरक्षित है
कारण नारी ही नारी की शत्रु बन गई है
बेवजह ही नारी को आरोपित किया जाता है
जबरदस्ती झूठे लांछन लगाया जाता है
अपनी कोख से असह्य पीड़ा सह जन्म देती है
सीने को चीरकर दुग्ध की धारा बहाती है
सारा कष्ट सहनकर भी वो मरहम लगाती है
नारी है तो क्या गर्त में डाल दोगे
सारा समाज नारी को बोझ समझता है
गर्भ में ही मारकर दुनिया में आने से रोकता है
पुरुष के संरक्षण में प्रताड़ित पल्लवित होती है
मंदिर में नारी शक्ति की पूजा करता है
घर की नारी शक्ति को प्रताड़ित करता ह...























