जीवन का तत्व
रागिनी सिंह परिहार
रीवा म.प्र.
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तेरा मेरा करते करते एक दिन चले जाना है,
जो भी कमाया यही रह जाना है।
करलो कुछ अच्छे कर्म,
साथ तेरे यही जाना है।
रोने से तो आशू भी पराये हो जाते हैं,
लेकिन.....
मुस्कुराने से पराये भी अपने हो जाते हैं।
मुझें वो रिश्ते प्रसंद हैं,
जिसमे मैं नही, हम है।
इंसानियत दिल से होती हैं, हैसियत नही।
ऊपरवाला कर्म देखता है,
वसियल नही...
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परिचय :- रागिनी सिंह परिहार
जन्मतिथि : १ जुलाई १९९१
पिता : रमाकंत सिंह
माता : ऊषा सिंह
पति : सचिन देव सिंह
शिक्षा : एम.ए हिन्दी साहित्य, डीएड शिक्षाशात्र, पी.जी.डी.सी.ए. कंप्यूटर, एम फील हिन्दी साहित्य, पी.एचडी अध्ययनरत
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