इस दीवाली …
प्रेक्षा दुबे
उज्जैन ( म. प्र.)
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एक दिन के लिए ही सही सबकी उदासी मिटाने को...
अँधेरे दिलों में भी रोशनी जगाने को...
कड़वे रिश्तों में मीठी चाशनी घोल जाने को...
बेरंग सड़कों पर रंग बिखराने को....
भागती सी जिंदगी को थोड़ा थमाने को...
मोबाइल से बाहर की दुनिया दिखाने को...
सारा शहर आज यूँ जगमगाने को....
रामचन्द्रजी की याद दिलाने को...
आध्यात्मिकता से फिर जोड़ जाने को..
और
सारे आलसीयों को काम पर लगाने को...!!!
तुमने किया इतना अब मेरी बारी हैं...
ग्रीन दिवाली की पूरी तैयारी है..
चीनी सामानों की ना कोई पारी है
मिट्टी के दिये और रंगोली प्यारी है
बिना पटाखों के मस्ती भी जारी है
प्रदूषण रोकना सबकी जिम्मेदारी है
बदलाव लाने की सोच हमारी हैं.....
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लेखिका का परिचय :- प्रेक्षा दुबे
निवासी - उज्जैन ( म. प्र.)
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