अंतर्मन
रशीद अहमद शेख 'रशीद'
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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क्या कहूँ बात उलझन की।
मत पूछो अंतर्मन की।
छा गया बहुत कोरोना।
पीड़ित जग का हर कोना।
दृग झड़ी लगी सावन की।
मत पूछो अंतर्मन की।
लगता कर्फ्यू कोरोना।
दुर्भर है जगना-सोना।
सीमा है घर-आँगन की।
मत पूछो अंतर्मन की।
सूने बाज़ार सभी हैं।
धीमे व्यापार अभी है।
दुर्दशा हुई जन-जन की।
मत पूछो अंतर्मन की।
नव विवाहिता थी सोना।
ले गया कंत कोरोना।
है दशा बुरी विरहन की।
मत पूछो अंतर्मन की।
परिचय - रशीद अहमद शेख 'रशीद'
साहित्यिक उपनाम ~ ‘रशीद’
जन्मतिथि~ ०१/०४/१९५१
जन्म स्थान ~ महू ज़िला इन्दौर (म•प्र•) भाषा ज्ञान ~ हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दू, संस्कृत
शिक्षा ~ एम• ए• (हिन्दी और अंग्रेज़ी साहित्य), बी• एससी•, बी• एड•, एलएल•बी•, साहित्य रत्न, कोविद
कार्यक्षेत्र ~ सेवानिवृत प्राचार्य
सामाजिक गतिविधि ~ मार्गदर्शन और प्रेरणा
लेखन विधा ~ कविता,गीत...












