मधु मिलन राग
मीना भट्ट "सिद्धार्थ"
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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क्यों कलंकित लोग करते,
हैं सदा अनुराग को।
गा न पाती कोकिला है,
मधु मिलन के राग को।।
काँपती है हर कली भी,
अब भ्रमर गुंजार से।
तोड़ बंधन प्रीत के सब,
झाँकते क्यों द्वार से।।
कौमुदी कब तक बचेगी,
दानवों के वार से।
दग्ध हिय प्रतिबिम्ब तेरा,
ताकता है बाग को।
सुप्त फेरे प्रीत के हैं,
हारती है दामिनी।
ठग गया है काम तन को,
है बिलखती कामिनी।।
राह प्रियतम नित निहारे,
प्रेम आकुल भामिनी,
पूछती है केश वेणी।
तन लगे इस दाग को
रो रहा है देख अम्बर,
टूटते विश्वास को।
छल गया है चाँद छलिया,
फिर मिलन की आस को।।
दे रहे आवाज आँसू,
जा रहे मधुमास को।
नित गरल के घूँट पी कर,
देखते बस झाग को।।
परिचय : मीना भट्ट "सिद्धार्थ"
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सुमित...







