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गणपति बप्पा : ज्ञान के दाता
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गणपति बप्पा : ज्ञान के दाता

राकेश कुमार दास पिपिलि, पुरी ******************** हे विघ्नहर्ता गणपति बाप्पा, हर शुभारंभ के आधार। तेरे बिना यह जग सूना है, तू ही है ज्ञान का भंडार॥ विद्यालय से मंदिर तक, तेरा ही गुणगान। तेरे नाम से खिलते हैं, विद्या के उद्यान॥ शिवपुत्र! जब शीश गंवाया, फिर भी दिखाया ज्ञान का प्रकाश। तेरे आशीष से जग ने पाया, विद्या का अनमोल विश्वास॥ शिक्षा से जीवन होता है उज्जवल, अज्ञान से होता पतन। तेरी कृपा से मिटते अंधेरे, ज्ञान बनता जीवन धन॥ ना कोई वंचित शिक्षा से हो, सबको मिले तेरा आशीर्वाद। तेरी शरण जो आए गणपति, उसका जीवन हो सफल और आबाद॥ तेरी मूर्ति में है आस्था, तेरे चरणों में है विश्वास। गणपति बाप्पा मोरया... मंगल मूर्ति मोरया...॥ परिचय : राकेश कुमार दास निवासी : पिपिलि, पुरी घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है। ...
हे गणपति
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हे गणपति

प्रीतम कुमार साहू 'गुरुजी' लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़) ******************** छत्तीसगढ़ी रिद्धी-सिद्धि के तै स्वामी, तोरेच गुन ल गावत हँव। सजे सिहासन आके बइठो, पँवरी म माथ नवावंत हँव।। हे गणपति, गणनायक स्वामी, महिमा तोर बड़ भारी हे। माथ म मोर मुकुट सजत हे, मुसवा तोर सवारी हे।। साँझा बिहिनिया करँव आरती, लडवन भोग लगावंत हँव। सजे सिहासन आके बइठो, पँवरी म माथ नवावंत हँव।। माता हवय तोर पारबती अउ पिता हवय बम भोला। दिन दुखियन के लाज रखौ, बिनती करत हँव तोला।। पान-फूल अउ नरियर भेला, मै हर तोला चघावंत हँव। सजे सिहासन आके बइठो, पँवरी म माथ नवावंत हँव।। अंधरा ल अखीयन देथस अउ बाँझन ल पुत देवइयाँ। बल,बुद्धी के तै हर दाता, सबके बिगड़े काम बनइयाँ।। हे गणराज, गजानंद स्वामी मै हर तोला मनावंत हव। सजे सिहासन आके बइठो, पँवरी म माथ नवावंत हँव।। परिचय :- प्री...
गजानंद स्वामी
आंचलिक बोली, भजन

गजानंद स्वामी

प्रीतम कुमार साहू लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़) ******************** छत्तीसगढ़ी रिद्धी सिद्धि के तै स्वामी, तोरेच गुन ल गावत हँव ! सजे सिहासन आके बइठो,पँवरी म माथ नवावंत हँव !! हे गणपति, गणनायक स्वामी, महिमा तोर बड़ भारी हे ! माथ म मोर मुकुट सजत हे, मुसवा तोर सवारी हे !! साँझा बिहिनिया करँव आरती, लडवन भोग लगावंत हँव ! सजे सिहासन आके बइठो, पँवरी म माथ नवावंत हँव !! माता हवय तोर पारबती अउ पिता हवय बम भोला ! दिन दुखियन के लाज रखौ, बिनती करत हँव तोला !! पान-फूल अउ नरियर भेला, मै हर तोला चघावंत हँव ! सजे सिहासन आके बइठो, पँवरी म माथ नवावंत हँव !! अंधरा ल अखीयन देथस अउ बाँझन ल पुत देवइयाँ बल,बुद्धी के तै हर दाता, सबके बिगड़े काम बनइयाँ !! हे गणराज, गजानंद स्वामी मै हर तोला मनावंत हव ! सजे सिहासन आके बइठो, पँवरी म माथ नवावंत हँव !! परिचय :- प्रीतम कुमार साह...
श्री विघ्न हर्ता गणेश
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श्री विघ्न हर्ता गणेश

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** गणपति मंगल दायक हो तुम, सब के विघ्न हरो। शरणागत है शरण तुम्हारी, जीवन सुलभ करो। गणपति मंगल…. दीनबंधु, दीनानाथ, दयानिधी सब पर दया करो। सिध्द विनायक, जन गण नायक चिन्ता हरण करो। अनन्त भुवन के अधिपति हो तुम, मंछा पूरण करो। देकर वांछित फल सब को, मन हर्षित करो। गणपति मंगल… निर्मल मन हो, कपट न छल हो, भावना ऐसी भरो। मधुर हो वाणी, हस्त हो दानी, सक्षम ऐसा करो। राग द्वेष, मद निकट न आवे ऐसी दृष्टि करो। जन जन हो सुखी धरा पर, ऐसी वृष्टि करो। गणपति मंगल…. परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक :१४ नवम्बर १९४६ शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल.बी. निवासी : उज्जैन (मध्य प्रदेश) रुचि : आपकी बचपन में व्यायाम शाला में व्यायाम, क्षिप्रा नदी में तैराकी और शिक्षा अध्ययन के साथ कविता, गीत, नाटक लेखन मंचन आदि म...
श्री गणेश जी की आरती
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श्री गणेश जी की आरती

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** आरती गणपति गौरी सुतम्। सर्व मगंलकारी है गजमुखम्। आरती गणपति… सर्व लोक कल्यानार्थ अवतरितम्। सर्व सिद्ध विनायक विघ्न हरणम्। आरती गणपति… सर्व देव वरद, हो प्रथम पुजितम्। सर्व दिव्य कलाओं मे हो परिपूर्णम् आरती गणपति… सर्व शक्ति स्वरूप है सिद्धेश्वरम्। सर्व माया अधिपति विश्वेश्वरम्। आरती गणपति… सर्व बाधा हरे गणेश आयुधम्। सर्व मूषक, पाश, भुजंग, अंकुशम्। आरती गणपति… सर्व मधुर, मनोरम ये छबी अनुपम। सर्व देवों मे देव ,तुम आशुतोषम्। आरती गणपति… सर्व दुर्दिन, दुविधा, दुःख हरणम्। गण नायक, गजानन, गज कर्णम्। आरती गणपति... सर्व विद्यावन, गुणी, अति चतुरम्। सर्व आनन्द दायक है चतुर भुजम्। आरती गणपति… सर्व काज सँवारे शशीवरनम्। आए जो गजानन की शरणम्। परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिना...
कृष्ण से गुहार
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कृष्ण से गुहार

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** हे कृष्ण पुकारे जब-जब, देना हमें सहारा। हम है बालक तुम्हारे, तुम ही हो पालनहारा। हे कृष्ण पुकारे …. आया जो इस धरा पर, सब मे है अंश तुम्हारा। देखें जिधर भी हम, लगता है सब कुछ न्यारा। मन मोहक इस छबि मे, दिखता है रुप तुम्हारा। संरचना ये तुम्हारी, इस सृष्टि को नमन हमारा। हे कृष्ण पुकारे …. कर्म करें निष्काम भाव से, ये है कथन तुम्हारा। जैसे कर्म करेंगे, होगा वैसा भाग्य हमारा। देना इतनी शक्ति, गुनाहों से करें किनारा। जाये उधर ना हम कभी, जहां हो अहित हमारा। हे कृष्ण पुकारे …. जब जब सजल नयन से, भक्तों ने तुम्हें निहारा। लेकर शरण में अपनी, कष्टों से उसे उबारा। हाथों मे है तुम्हारे, ये जीवन का चक्र सारा। रखना सानिध्य मे अपनी, हो जब जब जनम दुबारा। हे कृष्ण पुकारे …. परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मो...
बाबा महाकाल
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बाबा महाकाल

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** बम भोला बम भोला कालों के काल। डम् डम् डमरू वाले मृत्युंजय महाकाल। बम भोला… जटा में गंग धारा है शशि धरे है भाल। ग्रीवा में भुजंग संग रुद्राक्ष की माल। बम भोला… कंठ में हलाहल है त्रिलोचन में ज्वाल। भस्म रमैया भूतेश्वर के अंग वस्त्र है खाल। बम भोला… त्रिशूल अंकुश बाबा का तीन लोग की चाल। तीनों लोक अधीन है पृथ्वी, नभ, पाताल। बम भोला… स्वयं सिद्ध, स्वयंभू है सिद्धेश्वर महाकाल। समाधि में लीन रहते हैं बाबा सालो साल। बम भोला… साक्षात् शिव रुप है ज्योतिर्लिंग महाकाल। छबि अर्द्धनारीश्वर की लगे बेमिसाल। बम भोला… भोले शम्भु भोलेनाथ भोलेश्वर महाकाल। शरण में तेरी आए बाबा अब तू ही सम्भाल। बम भोला… परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक :१४ नवम्बर १९४६ शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल...
महादेवा
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महादेवा

प्रीतम कुमार साहू लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़) ******************** छत्तीसगढ़ी भाषा में भजन काल के महाकाल कहावय, शिव शंकर महादेवा भक्तनमन के भाग जागे जेन करे तोर सेवा। अंग म राख, भभूत चुपरे बईला म करें सवारी भूत, प्रेत अउ मरी मसान जम्मों तोर संगवारी।I दानी नइ हे तोर असन कस हे सम्भू त्रिपुरारी कतका तोर जस ल गावँव महिमा हे बड़भारी।I गंगा हर तोर जटा म साधे, कहाय तै जटाधारी बघुवा के तै खाल पहिरे जय हो डमरूधारी।I गणेश, कार्तिक तोर लाल कहावय पार्वती सुवारी तोर पउँरी म माथ नवावँय जम्मो नर, नारी।I असुर मन कतकोंन छलिस तोला सिधवा जान हलाहल के पान करइय्या नीलकंठ भगवान।I परिचय :- प्रीतम कुमार साहू (शिक्षक) निवासी : ग्राम-लिमतरा, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़)। घोषणा पत्र : मेरे द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। ...
नन्द यशोदा धाम
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नन्द यशोदा धाम

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** चल रे मनवा तीरथ करने नन्द यशोदा के धाम। जहां बिराजे जगत के पालक श्री कृष्ण, बलराम। चल रे मनवा … नयन को सुख और चैन मिलेगा ह्रदय बसेंगे श्याम। लीला धर की लीला भूमि करने उसे प्रणाम। चल रे मनवा … शरणागत को शरण मे लेकर सद् गति देना काम। सर्वेश्वर उद्धारक सबके तारण हार है नाम। चल रे मनवा … यमुना जी पटरानी तीरे बसा है गोकुल गाम। पुष्टि पंथ के जनक प्रभु जी करें यहाँ विश्राम। चल रे मनवा … बृज भूमि चौरासी कोस है प्रेम रतन की खान। राधा जी संग रास रचाते हैं कृपा सिन्धु भगवान। चल रे मनवा … चरण धूलि अनुरागी भक्त जन करें सुधा रस पान। कुंड कुंड है मानसरोवर यही इस की पहचान। चल रे मनवा … वृन्दावन की वसुंधरा मे प्रकट है गऊ लोक मान। आत्म तृप्ति अभिलाषी ज्ञानी करते यहाँ पे मुक़ाम। चल रे मनवा … परिचय ...
बोलो जय महाकाल …
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बोलो जय महाकाल …

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** क्षिप्रा मैया से चले मिलने कालों के काल। झूमें नाचे गाये भक्त बजाए झाँझ करताल। बोलो जय महाकाल … बोलो जय महाकाल … पुत्र गणपति खड़े है लेके फूलों की माल। हर्षिद्धी माँ आई लेके आरती की थाल। बोलो जय महाकाल … बनी दुल्हनियाँ अवन्तिका बढ़ गई उसकी शान। क्षिप्रा जी के तट पर आज उड़े रे गुलाल। बोलो जय महाकाल … कर सोलह सिंगार ओढ़ चुनरियाँ लाल। चरण पखारे क्षिप्रा मैया आज हुई रे निहाल। बोलो जय महाकाल … हरि से मिलने आए बाबा पालकी में विशाल। हर्षित होकर मिले गले से मदन गोपाल। बोलो जय महाकाल … दर्शन देने निकले प्रजा को बाबा महाकाल। नगर भ्रमण कर जाने बाबा भक्तों के हाल। बोलो जय महाकाल … परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक :१४ नवम्बर १९४६ शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल.बी. निवासी : उज...
लागी लगन …
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लागी लगन …

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** मन मीत मेरे मन भावन की लागी लगन शरण तेरी आवन की मन मीत …. ये दुनियाँ है गहरा सागर भर न सका कोई पूरी गागर जीवन पथ की इन उलझन में मिली छाँव किसे सावन की मन मीत …. बन्दे जितने भेजे जगत् में देकर अपनी वाणी सबने अपने मन मत से तेरी महिमा बखानी मतभेदों की इस दुनिया में भटक रहा है प्राणी तेरी रचना तू ही जाने कौन विधि तुझे पावन की मन मीत …. झूठी है ये जगत् की माया नैनों ने अब तक मुझे भरमाया परिणति है ये तेरी कृपा की मन चाहत हरि गुण गावन की मन मीत…. परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक :१४ नवम्बर १९४६ शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल.बी. निवासी : उज्जैन (मध्य प्रदेश) रुचि : आपकी बचपन में व्यायाम शाला में व्यायाम, क्षिप्रा नदी में तैराकी और शिक्षा अध्ययन के साथ कविता, गीत, नाटक लेखन मंचन आदि में ग...
क्यों लेते हों भगवान परीक्षा
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क्यों लेते हों भगवान परीक्षा

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** क्यों लेते हों भगवान परीक्षा अपने भक्तों की। सहते हो स्वयं भी पीड़ा हरने अपने भक्तों की। क्यों लेते ... राम रुप में धरा पर आए सुन पुकार ऋषियों की। यज्ञ देव का मान बढ़ाया, गोद भरी कौशल्या की। असुरों का उद्धार था करना राह चुनी वन जाने की। वचन बना आधार पिता के, मति मंद करी कैकेयी की। क्यों लेते … परित्याग कर बन्धन सारे, वेश धारण कर विरक्तियों की। चौदह वर्ष भ्रमण कर वन में, निद्रा हर ली लक्ष्मण की। देना था संदेश जगत् को, भाई प्रेम के बन्धन की। चरण पादुका पूजी भरत ने, वियोग में श्री राम की। क्यों लेते ... बाली वध कर सेना बनाई, सुग्रीव संग हनुमान की। सन्तों मुनि यो से पाईं शिक्षा, दिव्यास्त्रों के संधान की। राम से बड़ा नाम राम का, ये महिमा सेतु पाषाण की। रावण वध कर लंका ढहाईं, ली अग्नि परीक्षा सीता ...
राम नाम की महिमा
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राम नाम की महिमा

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** शाश्वत मंत्र दिया हनुमत ने, उसका हूं मैं सुमिरन करता। करुणा बरस रही ईश्वर की, उससे हूं नित झोली भरता। शाश्वत मंत्र... हनुमत राम जप रहे प्रतिपल, दोनो हाथों इसे लुटाते। जो आस्था को दृढ़ करपाते, उनकी झोली मोती आते। प्रभु चरणों में डाल दुखों को, वोnअभक्तों के दुख है हरता। शाश्वत मंत्र... जिसने भी इस मंत्र को पकड़ा, उसका जीवन धन्य हो गया। शबरी ने था नाम को जपा, दरस को ईश्वर घर पे आगया। शिव जी जपते प्रतिपाल उसको, वो शिव का है पूजन करता। शाश्वतमंत्र ... राम नाम को रोगी जपता, उसकी औषधि है बन जाता, राम राम है योगी जपता तो, आत्मत्व में है जग जाता। सांसों में प्रभु नाम रमा पाया, वो जीवन मुक्त है करता। शाश्वत मंत्र... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणि...
राधा रानी मै बरसाने में …
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राधा रानी मै बरसाने में …

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** राधा रानी मै बरसाने में आ गया, खुद बताओ कि कैसे मनाऊं तुम्हे। तेरे कान्हा के कुछ गीत मैने लिखे, आओ बैठो तो उनको सुनाऊं तुम्हे। राधा रानी... राधा रानी हो तुम, महारानी हो तुम, बृज की गलियों की रसमय कहानी हो तुम। ब्रज में सब हर समय नाम तेरा जपे, राधे राधे ही मै भी सुनाऊं तुम्हे। राधा रानी... जो भी बसते यहां, उनको तुम पालती, उनके नीरस हृदय में, तुम रस डालती। क्या से क्या बन गया हूं, शरण तेरी पा, जानती हो तो क्या मैं बताऊं तुम्हे। राधा रानी... सोते जगते जपो, हंस के गाके जपो, राधा रानी ये सुनने को आ जाएंगी। नाम पावन है, ये बस गया सांस में, रीझकर तुझपे करुणा बहा जाएंगी। तेरा वात्सल्य कितना है प्यारा, चीर अंतर को कैसे दिखाऊं तुम्हे। राधा रानी... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) ...
जय-जय हे बजरंगबली
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जय-जय हे बजरंगबली

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** सदा सहायक देव प्रबलतम, परमवीर हनुमाना। संकटमोचन, शत्रु विनाशक, जय-जय दयानिधाना।। मातु अंजनालाल शौर्यमय, असुरों को संहारें। रामकाज करने को आतुर, पाप जगत के मारें।। सूर्य निगलकर बने अनूठे, वायुपुत्र देवंता। महावीर सुग्रीव सहायक, करें दुःखों का अंता।। भयसंहारक, मंगलकारी, पूजन बहुत सुहाना। संकटमोचन, शत्रु विनाशक, जय-जय दयानिधाना।। दहन करी लंका हे ! देवा, तुम हो प्रलयंकारी। परम शक्तियाँ तुम में रहतीं, बनकर के साकारी।। हे हनुमंता, हे भगवंता, तेरा रूप निराला। हर दिन है उजला हो जाता, हो कितना भी काला।। जीवन सुमन खिलाते हरदम, जग ने तुमको माना। संकटमोचन, शत्रु विनाशक, जय-जय दयानिधाना।। रामदूत, अतुलित बलधामा, जीवन देने वाले। सब कुछ तुम गतिमय कर देते, काट व्यथा के जाले।। सीता की कर खोज बन गए, तुम तो एक कहानी। ...
जय श्री महाप्रभु वल्लभ बोल
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जय श्री महाप्रभु वल्लभ बोल

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** एक सितारा प्रकटा था जग में वाणी में अमृत घोल। श्रीकृष्ण: शरणम मम का मन्त्र दिया अनमोल। श्रीनाथ ज़ी आराध्य उनके रखें उनसे हमजोल। पद वन्दन कर मुख से जय श्री महाप्रभु वल्लभ बोल। श्रीकृष्ण: शरणम मम का मन्त्र दिया अनमोल। ज्ञान बुद्धि विवेक में उनसा था ना कोई मेल पंडित ज्ञानी वेद पुराणी शास्त्रार्थ में सब फेल। तत्व ज्ञान का बोध कराया भेद दिये सब खोल। श्री कृष्ण: शरणम मम का मन्त्र दिया अनमोल। बेठक चौरासी महाप्रभु की निधि बड़ी अनमोल पारायण कर भागवत उद्धृत किये सब बोल। आत्मसात् कर सद्‌गुरु वाणी अन्तर चक्षु खोल। पद वन्दन कर मुख से जय श्री महाप्रभु वल्लभ बोल। एक सितारा प्रकटा था वाणी में अमृत घोल। भक्ति पुष्टि का अलख जगाया सेवा विधि बोल। श्री कृष्ण की लीलाओं से परत पड़ी दी खोल। जनम सफल कर प्राणी अष्टाक्षर मन्त्र बोल। श्र...
महाकुंभ महिमा
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महाकुंभ महिमा

प्रो. डॉ. विनीता सिंह न्यू हैदराबाद लखनऊ (उत्तरप्रदेश) ******************** गंगा, जमुना और सरस्वती तीनों हैं इक साथ में तीनों नदियों का संगम है तीर्थ राज प्रयाग में १. उज्जवल श्यामल पानी मिलकर बहे निर्मल जल धारा कण-कण में है इसके अमृत, कितनों को है तारा ब्रह्मा, शिव का तेज समाया इस निर्मल जल धार में २. इस तीर्थ महिमा की गाथा वेदों ने है गायी यहाँ ऋषि और मुनियों ने हैं कितनी सिद्धियाँ पायीं ज्ञान मिले अध्यात्म जगे संगम के पुण्य प्रताप में ३. भारद्वाज मुनि का आश्रम यहाँ प्रभु राम जी आए थे माता सीता और लक्ष्मण संग में आशीष पाए थे प्रभु राम ने चरण पखारे इस निर्मल जल धार में ४. दरस परस कर महाकुंभ में पुण्य प्रताप जगा लो पावन इस जल की धारा में मन का मैल मिटा लो पाप कटे संताप मिटे इस पावन जल की धार में परिचय :- प्रो. डॉ. विनीता सिंह निवासी : न्यू हैदराबाद लखनऊ ...
सजी अयोध्या आज
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सजी अयोध्या आज

प्रो. डॉ. विनीता सिंह न्यू हैदराबाद लखनऊ (उत्तरप्रदेश) ******************** सजी अयोध्या आज ख़ुशियाँ मनाओ रे जन्मे आनंद धन राम मंगल गाओ रे ख़ुशियाँ मनाओ री, मंगल गाओ रे प्रगटे दीन दयाल, ख़ुशियाँ मनाओ रे शुक्ल पक्ष मधु मास पुनीता नौमी तिथि सब विधि अनुकूला जनम लिए करतार, जग सुख दायी रे रानी कौशल्या बलि बलि जायें लालन देखि परम सुख पायी अनुपम रूप निहार, मन हर्षाई रे दशरथ के द्वारे बाजे रे बधाई अन्न धन सोना मोहर लुटाई घर-घर मंगल चार, दीप जलाओ रे राम लला के दर्शन कर लो पग पंकज पर शीश नवा लो पावन है इनका नाम, पल-पल ध्याओ रे परिचय :- प्रो. डॉ. विनीता सिंह निवासी : न्यू हैदराबाद लखनऊ (उत्तरप्रदेश) व्यवसाय : नेत्र विशेषज्ञ सेवा निवृत, भूतपूर्व विभागाध्यक्ष नेत्र विभाग, के.जी.एम.यू. लखनऊ अन्य गतिविधियां : १. भजन एवं गीत गायन के लिए आकाशवाणी लखनऊ से मान्यत...
माँ मंगल करतीं हैं
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माँ मंगल करतीं हैं

अंजनी कुमार चतुर्वेदी "श्रीकांत" निवाड़ी (मध्य प्रदेश) ******************** आदिशक्ति अति रूप मनोहर, माँ कूष्मांडा ने पाया। दिवस चतुर्थ परम पावन है, जन-जन मन हरसाया। अष्टभुजा माँ पूजी जाती, नवदुर्गा चौथे दिन। पापी दुष्टी और निशाचर, संघारे माँ अनगिन। शेर सवारी करती हैं माँ, सबके दुख हरतीं हैं। अपने भक्तों के जीवन में, माँ मंगल करतीं हैं। है स्वरूप तेजोमय माँ का, बल आरोग्य प्रदाता। अष्टभुजी माँ का स्वरूप यह, सारे जग को भाता। रोग शोक भय कष्ट मिटाती, धन संपन्न बनाती। माँ के चरणों में नत होकर, दुनिया खैर मनाती। काजल चूड़ी बिंदी पायल, माँ को सभी चढ़ाएं। कंघी दर्पण देकर माँ को, सुख सौभाग्य बढ़ाएं। मालपुआ अति प्रिय माता को, हलवा भी चढ़ता है। माता की सेवा से सब का, जन धन भी बढ़ता है। आदि शक्ति कूष्मांडा माता, सृष्टि की निर्माता। जो आता है शरण तुम्हारी, ...
राम युग
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राम युग

किरण पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** राम ही श्वास है राम ही आस है, राम ही तो है जीवन का, सार ही बस राम हे। जन्म से मृत्यु तक, जीवन के आदर्श राम, राम के चरित्र से जीवन महान है। बडो का आदेश राम, गुरू का सम्मान राम, छोटो पे दुलार राम, स्नेह ही तो राम है। निषाद के तो भाव राम, केवट के तो प्रेम राम, शबरी के आस मै बस राम ही तो श्वास है। निर्बल के बल राम, निर्धन के धन राम, शत्रु पे विजय राम, अजातशत्रु राम है। सुन्दर सुशील राम, कमलनयन देखो राम। जानकी की जान तो बस राम ही बस राम। सूर्य का सा तेज राम, किरण मै प्रकाश राम, विजय पताका देखो, सनातन के राम है। जन्मभूमि की जीत राम, अयोध्या के राजा राम, जय श्री राम के नारो मै, बस राम-राम आवाज है। संतो की तपस्या राम, भक्तो की भक्ति राम, मोदी योगी के तो साहस, दृढ़ संकल्प राम है। पर...
राम शरण में चल रे मनवा
भजन, स्तुति

राम शरण में चल रे मनवा

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** राम शरण में चल रे मनवा, जीवन सफल बनायें। राम शरण में सभी मंगल, मन को मत भटकाये। राम शरण में... राम शिवम् है राम सत्य है, सब देवता उनमें समाये। राम की स्तुति करने पर, संग सारे देवता पूजे। राम नाम है सब हितकारी, परम सुख बोध कराम्। महादेव भी बैठे समाधि, राम में ध्यान स्थान। राम शरण में… राम नाम अमृत की शोभा, भाग्य बिना नहीं मिलेगा। बारम्बार जन्म ले जीव, फिर धरा पर आये। राम ही दाता राम विधाता, जिसके मन ये समाये। राम की महिमा गाने वाले, घर-घर पूजे जाये। राम शरणम्… राम सनातन सच्चिदानंद, मार्ग सुगम दिखलायें। राम राज्य की परिकल्पना से, मन हर्षित हो जाये। राम कृपा उस पर हो जाये, जो भजन राम के गाये। चरण वन्दना करो भव सागर तर जाये। राम शरण में … परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म द...
डम-डम डमरू दिगम्बरा
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डम-डम डमरू दिगम्बरा

डाँ. बबिता सिंह हाजीपुर वैशाली (बिहार) ******************** डम-डम डमरू दिगम्बरा, देवाधिदेव भगवान! जयति-जयति जगदीश्वरा। कर त्रिशूल कर्ण कुण्ड, जपता रहे मन पंचाक्षर! जयति-जयति जगदीश्वरा। भाल चन्द्र तन बाघम्बरा, शिवम् सत्यम् सुन्दरा ! जयति-जयति जगदीश्वरा। अंग विभूति छवि मनोहरा, नमामि सदा शिव शंकराय! जयति-जयति जगदीश्वरा। जगत सर्जन प्रलयंकरा, नाथ दयानिधि दानिशवरा! जयति-जयति जगदीश्वरा। सरल हृदय मेरे कालेश्वर, हे जटाधारी अभयंकरा! जयति-जयति जगदीश्वरा। पार्वती पति प्राणेश्वरा, विश्वनाथ विश्वंभरा! जयति-जयति जगदीश्वरा। श्री नीलकंठ सुरेश्वर, चन्द्रमौलि चिदम्बरा! जयति-जयति जगदीश्वरा। नागेन्द्रहारा हे गंगाधारा, जय-जय महायोगीश्वरा! जयति-जयति जगदीश्वरा। परिचय : डाँ. बबिता सिंह निवासी : हाजीपुर वैशाली (बिहार) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि...
विनय
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विनय

प्रो. डॉ. विनीता सिंह न्यू हैदराबाद लखनऊ (उत्तरप्रदेश) ******************** सत्ता तुम्हारी भगवन जग में समा रही है तेरी दया सुदृष्टि सृष्टि सजा रही है रवि चंद्र और तारे तूने सभी बनाए विस्तृत वसुंधरा पर सागर भी हैं बहाए जिनकी सतह हैं सुंदर मोतियों से सजाये (२) इन सब में ज्योति तेरी इक जग मगा रही है सुंदर सुगन्ध वाले फूलों में रंग तेरा पशु पक्षी चर अचर में कण कण में रूप तेरा हे ब्रह्म विश्व कर्ता वर्णन हो तेरा कैसे (२) हर कृति झलक तेरी तेरा करतब दिखा रही है भक्ति तुम्हारी भगवन क्यों कर हमें मिलेगी तेरी रची जो माया पल पल हमें ठगेगी तेरी चरण शरण हैं तुमसे यही विनय है (२) हो दूर यह अविद्या जग भ्रम बढ़ा रही है परिचय :- प्रो. डॉ. विनीता सिंह निवासी : न्यू हैदराबाद लखनऊ (उत्तरप्रदेश) व्यवसाय : नेत्र विशेषज्ञ सेवा निवृत, भूतपूर्व विभागाध्यक्ष नेत्र विभाग, के....
थोड़ी उससे प्रीत बढ़ा लूं
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थोड़ी उससे प्रीत बढ़ा लूं

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** ईश्वर ने एकांत दिया है, कुछ उसकी महिमा को गा लूं। उसके सुमिरन में रम के मै, थोड़ी उससे प्रीत बढ़ा लूं। ईश्वर ने ......... ईश्वर है करुणा का सागर, भक्ति के मोती लुटा रहा है। उसकी भक्ति पाने के मित, मैं भी तो झोली फैला लूं। ईश्वर ने....... वो तेरे अंतर में रहकर, प्रतिपल तेरा ध्यान धर रहा। उसके प्रति कृतज्ञता ज्ञापन, मित मैं थोड़े अश्रु बहा लूं। ईश्वर ने ......... वो तो सदा पिता बनके ही, सबको निज संतान मानता। मैं भी बनके बालक उसका, चरणों में निज शीश नवा लूं। ईश्वर ने.......... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने प...
प्रेम रसिया
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प्रेम रसिया

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** प्रेम रसिया राधा मन बसिया बसों मन मोरे श्याम। जनम जनम का सानिध्य पाऊँ बिसरे न तेरो नाम। प्रेम रसिया…… प्रेम पुलकित छवि तुम्हारी लोचन नयनाभिराम। प्रेम ज्योति प्रज्वलित हो वे प्रलाप रहे निष्काम। प्रेम रसिया…. प्रेम बन्धन बंधे बिहारी रसिक रहु हरि का नाम। प्रेम मगन और मुखर हो वाणी जपे निरन्तर नाम। प्रेम रसिया….. प्रेम समर्पण अर्पण तन मन चाहे ना कोई दाम। प्रेम समर में समर्थ रहु और मिलें गऊ लोक धाम। प्रेम रसिया…… प्रेम सरोवर समाएँ न गागर अनुपम कृष्ण का नाम। प्रेम जगत् में माया झूठीं पाए न कोई मुक़ाम। प्रेम रसिया…… प्रेम रतन सा कोई न सानी आये न दूजा काम। प्रेम ही ईश्वर की अनुभूति प्रेम ही ईश्वर का नाम। प्रेम रसिया…… परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक :१४ नवम्बर १९४६ श...