हमारी संस्कृति हमारी विरासत
शशि चन्दन
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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धरा से अम्बर तलक विस्तृत है,
हमारी "भारतीय संस्कृति",
देती है जो हर जड़ चेतना को,
सारगर्भित जीवन की स्वीकृति।।
है संगम यहाँ विविधता का,
पर लेष मात्र भी नहीं है कोई विकृति,
संविधान ने दिए हैं कई अधिकार,
जन जन में एकता ही एक मात्र संतुष्टि।।
यहाँ बच्चा बच्चा राम है,
और हर एक नारी में माँ सीता है,
यहाँ हर प्राणी को मिलती
माँ के आँचल में प्रेम की गीता है।।
बहती नदियों की धारा में
आस्था और विश्वास के दीपक जलते हैं,
कि मल मल धोये कितना ही तन को,
मगर श्रेष्ठ कर्मों से ही पाप धुलते हैं।।
इतिहास बड़ा पुराना है शिलालेखों में
कई राज़ हमराज से मिलते हैं,
मार्ग मिले चार ईश वंदन के,
मगर एक ही मंजिल पर जाकर रुकते हैं।।
रक्त-रक्त में मिलता एक दिन,
यहाँ ना कोई जात धर्म का ज्ञाता है,
"रहीमन धागा प्रेम का है",
दिलों से रिश्...
























