न जाने कहाँ से कहाँ
मालती खलतकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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उदधी का उच्च उफान
कूल की सीमा लाये
जन जीवन को
भिगोता वढता है
प्यासी धरा की ओर
वायु वेग भी साथ देता
उदधी को जल पावन
करने धरा को
मानो सन्देश देते
हम आ रहे है साथ-साथ।
यह शायद प्रकृति की कारीगरी
या जन-जीवन से खिलवाड
मानव मन समझ नही पाता
कहीं गिरीव्हर का गिरना
कहीं गगन से श्याम
मेघो का झांकना।
शायद कह रहे है
हे मानव अब तो सर्तक हो
सम्भल जा नही तो प्रकृति
का ताण्डव देख
कैसा होता है
एक क्षण मे न जाने
कहाँ से कहाँ होगे सब।
परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले...
























