सत्कर्म
रेखा दवे "विशाखा"
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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द्वन्द भरे इस जीवन में,
कुछ पाया, कुछ ना पाया।
जो पाया वह प्रसाद बना,
ना पाया वह अवसाद बना।
द्वन्द भरे इस जीवन में,
कुछ पाया, कुछ ना पाया।
कभी राग मिला, कभी विराग मिला।
कभी जीत मिली, कभी हार मिली।
जब जीत मिली तब प्रीति मिली।
जब हार मिली, तब रिक्त रही।
जब रिक्त रही, तब सत्कर्मो कि सुध मिली।
जब सुध मिली, तब दृढ हुई।
दृढ़ हुई, संकल्प लिए।
संकल्प लिए, कटिबद्ध हुई।
सत्कर्म को स्वीकार किया।
स्वीकार किया, सत्कर्म किये।
यही जीवन का आधार बने।
आधार बने, अविराम रहे।
अविराम रहे, अनुराग बढ़े।
अनुराग बढ़े, आनंद मिले।
आनंद जीवन का ध्येय बने।
द्वन्द भरे इस जीवन में,
कुछ पाया, कुछ ना पाया।
परिचय :- श्रीमती रेखा दवे "विशाखा"
शिक्षा : एम.कॉम. (लेखांकन) एम.ए. (प्राचीन इतिहास एवं अर्थ शास्त्र)
निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
वर्तमान में : श्री माधव ...






















