जल ही है जीवन
डॉ. पंकजवासिनी
पटना (बिहार)
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जल ही है जीवन, जल है अनमोल बन्धु
जीवनदायी जल दिए प्रभु कृपासिंधु
अहो मानव! इसे बूँद बूँद बचाइए
पृथ्वी का हिस्सा तीन है जल से भरा
उसमें दो भाग बर्फ ग्लेशियर है धरा
बचे एक हिस्से को जतन से सँभालिए
पेयजल संकट से त्राहि-त्राहि हैं लोग
चरणामृत सा कर इसका कृपण उपयोग
कर जल का दुरुपयोग संकट न बढा़इए
जल के जो हैं विविध स्रोत प्रकृति प्रदत्त
तृप्त होंगे धरा के जीव-जंतु समस्त
पयस्विनी सलिला में उच्छिष्ट न बहाइए
बरसे है जो अमृत आसमा से धरा पर
स्वच्छ गुणवत्तापूर्ण वर्षा जल छतों पर
तत्क्षण ही गढ्ढे में उस पय को जुगाइए
नीचे भूजल के स्तर को भी सुधारिए
हिमगिरि-संजीवनी लिय सुरसरि बचाइए
जल बिन जीवन नहीं, हर मूल्य बचाइए
परिचय : डॉ. पंकजवासिनी
सम्प्रति : असिस्टेंट प्रोफेसर भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय
निवासी : पटना (बिहार)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाण...




















