उड़ान
डॉ. रागिनी सिंह परिहार
रीवा (मध्य प्रदेश)
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सपनों में अगर चाहिए
उड़ान तो सुनो
गुरु ज्ञान के बिना
संभव नहीं सुनो
बचपन में मां ने
मुझको चलना सिखाया
उंगली पकड़ के मेरी
सही रास्ता दिखाया
जब थोड़ी सी बड़ी हुई
विद्यालय पहुंचाया
गुरुओं के बीच मुझको
नादान बताया
फिर गुरुओं ने हमारी
हमें मंजिल है दिखाया
के से कबूतर ज्ञ से ज्ञानी
मुझको सिखाया
थोड़ी और बड़ी हुई तो
विषय वस्तु बट गए
हिंदी,गणित,विज्ञान का
मतलब समझ गए
पर आज तक अंग्रेजी
समझ आई ना हमें
A फॉर एप्पल Z फॉर ज़ेबरा
समझ आया ना हमें
प्रथम गुरु मेरी मां बनी
जिसने दिया है जन्म
उस जन्म को साकार
बनाया है गुरुजन
अबोध है अज्ञान है
अंधकार में है हम
आपके सानिध्य से
चीनू बाई,
कल्पना चावला बने हम
बस आरजू यही कि
देश में हर नारी का हो नारित्व
हर घर में लक्ष्मीबाई हो
हर घर में विवेकानंद
सपनों म...





















