हमने क्या सीखा
डॉ. किरन अवस्थी
मिनियापोलिसम (अमेरिका)
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रवि सिखाता अनुशासन
नदी सिखाती आगे बढ़ना
पर्वत दे सीख अडिगता की
वृक्ष सिखाता है देना।
सीख लता की, तन्वी कोमल सी
ले संबल आगे बढ़ती कुछ देने को
तना सहारे पत्ते हिलते
प्राणवायु सबको देने को।
मानव मानव को सभ्य बताते
लड़ते-झगड़ते बढ़ते जाते
प्रकृति मां की गोद में पलते
पर उससे कुछ सीख भी पाते?
चींटी पक्षी कीट पतंगे
न लड़ते न द्वेष वो करते
न लूट न पत्थरबाजी
अपने दल में घूमा करते।
मानव सीखें इनसे अनुशासन
क्यों इतना आतंक मचा है
क्यों धरती विव्हल है
क्यों धरणी रोती पल-पल है?
कहां तहजीब और नफासत
संस्कार वो लुप्त हुए हैं
वो पौरुष के भाव कहां,
किसी गुफा में सुप्त पड़ें हैं?
प्रभु सृष्टि तुम्हारी है कुछ तो करना
भयभीत हिरन सी व्याकुल है
कुछ कोमल भाव स्नेह सने से
यहां वहां बिखरा देना।
परि...



















