शिक्षक
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प्रेक्षा दुबे
उज्जैन ( म. प्र.)
ज्ञान गंग की धार बहा जो,
चित्त शिष्य का शुद्ध करे।
स्वप्न भवन निर्माण सिखा जो,
अटल भविष्य की नींव बने।
जो भेदभाव के अन्धकार में,
बन शिक्षा का दीप जले।
शिक्षक है वो महाकोष जो,
ज्ञान निधि बन अमर रहे।
लेखिका का परिचय :- प्रेक्षा दुबे
निवासी - उज्जैन ( म. प्र.)
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