अधूरे ख्वाहिश
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माधुरी शुक्ला
कोटा
राह आसान नही है
इस जिंदगी की,
कब क्या हो जाये
किसी को नही पता।
इतनी मुकम्मल
पुर सुकून
होती जिंदगी, तो
लोग इबादत ही
छोड़ देते।।
पसन्द का क्या
मन का वहम ही
तो है, कब किसे
कर ले कुछ
नही पता।।
अधीरता ,बेकरारी
किसके लिए,
कुछ नही पता
बस हो रही है।।
अरमान ख्वाहिशे
कुछ तो ऐसेहै
अधूरे से, नही होते
कभी यह, पूरे।।
गर होता, इतना
आसान, पूरा होना
इनका, तो यू ही ना
निकलती जिंदगी।।
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लेखीका परिचय :-
नाम - माधुरी शुक्ला
पति - योगेश शुक्ला
शिक्षा - एम .एस .सी.( गणित) बी .एड.
कार्य - शिक्षक
निवास - कोटा (राजस्थान)
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