मृदुल वाणी
डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय"
ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
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हमारी वाणी ही
हमारी पहिचान हैं।
बिना वाणी के
हमारा शरीर बेजान है।
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वाणी मधुर हो तो
सुनने में आनंद आता है।
और कठोर हो तो
मन खराब हो जाता है।
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मीठी वाणी बोलने वाला
तीखे मिर्च भी बेच देता है।
कठोर वाणी बोलने वाला
मिठाई भी नहीं बेच पता है।
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नफरत करते है सभी
कठोर वाणी बोलने वाले से।
प्यार करते है सभी
मृदुल वाणी बोलने वालों से।
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मीठी वाणी से पराये भी
अपने हो जाते हैं।
कड़वा बोलने से अपने
भी दूर हो जाते है।
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कोई गीत गाता है
कोई भाषण देता है।
जब उनकी भाषा
होती है मृदुल
तो सुनने में
आनंद आता है।
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मधुर वाणी हमें
तरक्की के रास्ते
पर ले जाती है।
कठोर वाणी
हमें ऊपर से
नीचे गिरती है।
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यदि आप चाहते है
जिंदगी में आगे बढ़ना।
तो हमेशा अपनी
वाणी ...
















