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मेरे विचार

प्रतियोगिता
मेरे विचार

प्रतियोगिता

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** याद आते हैं बचपन के वो दिन जब हम विद्या अध्यन के लिए स्कूल जाते थे। विद्यालय मे वर्ष मे एक दो बार विद्यार्थियों मे बोलने की कला सीखने के लिए वाद विवाद प्रतियोगिता आयोजित की जाती थी। एक निश्चित विषय के ऊपर स्कूल के होनहार छात्र पक्ष अथवा विपक्ष मे बोलने के लिये भाग लेते थे। हम केवल श्रोता की श्रेणी मे आते थे, प्रतियोगिता मे भाग लेने की योग्यता नहीं थी, लेकिन इस प्रतियोगिता से कभी कोई मन मे कड़वाहट नहीं आती थी। संयोग से ग्यारहवीं कक्षा पास होते ही स्थानीय शासकीय विभाग मे नौकरी प्राप्त हो गई। जहाँ हमें विभाग के एक उच्च अधिकारी महोदय के स्थानान्तरित होने पर अपने विचार व्यक्त करने के लिये कहा गया। संकोच वश न चाहते हुए भी जीवन में पहली बार हमने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, हमारे साहब हमसे बिदा होकर जा रहे है, आप बहुत अच्छे व्यक्ति थ...
संयुक्त परिवार
मेरे विचार, संस्कार, संस्मरण, स्मृति

संयुक्त परिवार

=============================== रचयिता : विनोद वर्मा "आज़ाद" पांच भाई एक पुश्तैनी मकान में साथ रहते थे। जिसका पुनर्निर्माण १८००/ ठेके पर ठेकेदार ने किया था। एक बरामद, एक हाल, एक छोटा कमरा, एक दादी का कमरा, किचन, पानी की टँकी, एक शौचालय, एक बाथरूम, खुला बाड़ा, दक्षिण मुखी मकान के पूर्व में गलियारा था, ऊपर मंजिल कमरा एक था बस। पर पेड़-पौधे जगह अभाव में नही लग पाये। इसके पहले जो पुराना घर जब था उसमें बरामदा, बड़ा हाल,खोली और बाड़ा, एक टॉयलेट। बाड़े में शहतूत, कडिंग (विलायती इमली) और मीठी बोर का झाड़ यानी पेड़ पौधे लगे हुए थे। चार भाइयों की शादी हो गई थी, परिवार में माता-पिता, ४ जोड़े, दादी व एक छोटा पांचवे नम्बर का भाई, कुल जमा १२ सदस्यों का संयुक्त परिवार। संघर्षरत परिवार के पास एक सायकल के अलावा कोई वाहन नही। मांगलिक आयोजनों में बस से आना-जाना। एक रात रुकना ही, क्योंकि वाहन सुविधा नामम...