किसी का हमदर्द बने
प्रमेशदीप मानिकपुरी
भोथीडीह, धमतरी (छतीसगढ़)
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दर्द बढ़ जाता है तो सीने मे हूक सी उठती है |
तन्हाई का आलम भी तब नागिन सी डसती है ||
दर्द की अहसास भी अजीब सुकून देता है |
जो पास ना हो उसका भी अहसास देता है ||
दर्द को महसूस कर उसे बाँटने से घटती है |
दुख के बादल फिर तो धीरे-धीरे छटकती है ||
आओ दर्द बाँट कर एक दूजे का सहारा बने |
दर्द संग जीने मरने के नये नये अफ़साने बने ||
एक दूजे को सम्बल दे जीने का अधिकार दे |
दर्द मिटा कर एक दूजे को आदर एवं प्यार दे ||
दर्द का नाम अमर है इश्क के हर इम्तिहान मे |
दर्द तो मिलेगा ही दिल जला हो अगर प्यार मे ||
दर्द मे जीना,दर्द मे मरना,दर्द भी अहसास है |
दर्द का जीवन से रिश्ता गहरा और खास है ||
दर्द मे किसी का हमदर्द बने भुलाकर क्लेश |
अब दर्द मे जीवन जीना सीखना पड़ेगा प्रमेश ||
परिचय :- प्रमेशदीप मानिकपुरी
पित...

























