आखिरी शाम
ओंकार नाथ सिंह
गोशंदेपुर (गाजीपुर)
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ए संवत् २०७७ की आखिरी शाम है,
जो लिपट कर मुझ से ये कह रही है
कि, एक बार गले तो लगा लो,
अलविदा तो मैं खुद हो रही हूँ..
कभी मैं जीता,
कभी वक्त जीत गया,
इसी कशमकश में,
यह संवत् २०७७ बीत गया..
तारों भरी रात
अलविदा कह रही है,
अब लफ़्ज नम हो रहे हैं,
धड़कन थमने सी लगी है,
पर...
विक्रम संवत् २०७८ ये कह रही है,
उठ..
ईश्वर को नमन कर,
नव वर्ष का स्वागत कर..
अलविदा २०७७
स्वागत २०७८
परिचय :- ओंकार नाथ सिंह
निवासी : गोशंदेपुर (गाजीपुर)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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