बसंत
ममता रथ
रायपुर
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नव जीवन का उपहार है बसंत
भंवरे और कलियों की पुकार है बसंत
धरती सजी है सरसों की पीली चादर ओढ़कर
प्रकृति का यही श्रृंगार है बसंत
कोयल की आवाज गूँज रही है वन में
उसे सुन मन मे उठी झंकार है बसंत
चारों ओर आम बौराया हुआ है
महुआ की मादकता का नाम है बसंत
परिचय :- ममता रथ
पिता : विद्या भूषण मिश्रा
पति : प्रकाश रथ
निवासी : रायपुर
जन्म तिथि : १२-०६-१९७५
शिक्षा : एम ए हिंदी साहित्य
सम्मान व पुरस्कार : लायंस क्लब बिलासपुर मे सम्मानित, श्री रामचन्द्र साहित्य समिति ककाली पारा रायपुर २००३ में सांत्वना पुरस्कार, लोक राग मे प्रकाशित, रचनाकार में प्रकाशित
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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