बोलो प्रियतम! कब आओगे….?
बृजेश आनन्द राय
जौनपुर (उत्तर प्रदेश)
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कब से रस्ता देख रही हूॅं,
अब आओगे, तब आओगे ।
क्षण क्षण जीवन बीत रहा है,
बोलो प्रियतम! कब आओगे??
बारहमासा बीता जाए,
जीवन, बिरहा गीत सुनाए।
कितनी आई गर्मी -सर्दी,
कहकर के भी तुम ना आए।
ऋतु-चक्र अब घूम के पूछे,
कैसे मन तुम बहलाओगे ?
क्षण क्षण जीवन बीत रहा है,
बोलो प्रियतम! कब आओगे??
जब तुम मुझको छोड़ गए थे,
लगन वार का दिन प्यारा था।
सब गाँवों में खुशियाँ चहकी,
सब शुभमय अरु सब न्यारा था ।
तब तुम बोले थे पावस के,
आने पर ही फिर आओगे !
क्षण क्षण जीवन बीत रहा है,
बोलो प्रियतम! कब आओगे??
पुनवासी का मेला आया,
शरद काल मन अति हर्षाया।
अम्बर से तुम दमक रहे हो,
कतकी ने फिर-फिर दुहराया।
ऐसे ही सब जाड़ा बीता,
भानु-रश्मि तुम कब लाओगे ?
क्षण क्षण जीवन बीत रहा है,
बोलो प्रियतम! कब आओगे ??
'कल', परसों क...



















