पावन पानी आंसू भी
रशीद अहमद शेख 'रशीद'
इंदौर म.प्र.
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कहते हैं गंभीर कहानी आँसू भी।
कहलाते हैं पावन पानी आँसू भी!
आँखों को छलकाते आँसू !
पलकों को नहलाते आँसू!
उर जब-जब होता है भारी,
उसे क्षणिक सहलाते आँसू!
करते बातें याद पुरानी ऑंसू भी।
कहलाते हैं पावन पानी ऑंसू भी।
समाचार दुखदाई आता!
अत्याचार हृदय पर ढाता!
छिन्न-भिन्न हो जाता आनंद,
सुख-सुविधा का भवन ढहाता!
करते नीरस शाम सुहानी आँसू भी।
कहलाते हैं पावन पानी ऑंसू भी!
कभी-कभी आँखों तक आते!
पतित नहीं होते रुक जाते!
मुख स्मित कर अंतर्मन की,
वापस जाकर आग बुझाते!
कभी-कभी होते हैं ज्ञानी आँसू भी।
कहलाते हैं पावन पानी ऑंसू भी!
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परिचय - रशीद अहमद शेख 'रशीद'
साहित्यिक उपनाम ~ ‘रशीद’
जन्मतिथि~ ०१/०४/१९५१
जन्म स्थान ~ महू ज़िला इन्दौर (म•प्र•) भाषा ज्ञान ~ हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दू, संस्कृत
शिक्षा ~ एम• ए• (हिन्दी और अंग्रेज़ी साहित्य), बी...

























