काश
सुरेखा सुनील दत्त शर्मा
बेगम बाग (मेरठ)
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काश एक बार तुमने मुझे पुकारा होता,
टूटे हुए दिल को संवारा होता,
जिस तरह काटा है वक्त तुम्हारे बिना,
काश तुमने भी हर लम्हा ऐसे ही गुजारा होता,
तुमको ये जिद थी जैसे हो कबूलू तुमको,
मेरी ये चाहत थी कि जैसा है वो सिर्फ मेरा होता,
तेरे बिना खुश रहने का करती थी दिखावा,
दिल में है कसक काश तू मेरे बिना अधूरा होता,
तेरे चेहरे पर वो शबनम की बूंदे देखकर,
अपने आप को थोड़ा सा मैने भी तराशा होता,
चांद कहा बाबू कहा शोना भी कहा,
काश सिर्फ एक बार मेरी नेहा कहकर पुकारा होता...
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परिचय :- सुरेखा "सुनील "दत्त शर्मा
साहित्यिक : उपनाम नेहा पंडित
जन्मतिथि : ३१ अगस्त
जन्म स्थान : मथुरा
निवासी : बेगम बाग मेरठ
साहित्य लेखन विधाएं : स्वतंत्र लेखन, कहानी, कविता, शायरी, उपन्यास
प्रकाशित साहित्य : जिनमें कहानी और रचनाएं प्रकाशित हुई है :-
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