सत्य बानी
निर्मल कुमार पीरिया
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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मेरा मन अटका जा किली से,
ते बच गया दो पाटन झमेले से,
जब रँग लिया खुद तेरे निर्मल रँग,
ते क्यो कर भागें मन रँगरेज से...
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क्या सँग तेरे आया इस जग में,
ते ले जायेगा क्या सँग इस जग से,
बिन पट आया तू किया रुदन बहुत,
ते काहे मोह राखे तू इस मलमल से...
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ये चंद लम्हों की ही कहानी हैं,
ते पढ़ ले मन भर फिर रवानी हैं,
जब मसि घुल जायेगी दृगजल से,
ते बन्द पौथी अपनो ने सजानी हैं...
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परिचय :- निर्मल कुमार पीरिया
शिक्षा : बी.एस. एम्.ए
सम्प्रति : मैनेजर कमर्शियल व्हीकल लि.
निवासी : इंदौर, (म.प्र.)
शपथ : मेरी कविताएँ और गजल पूर्णतः मौलिक, स्वरचित और अप्रकाशित हैं
आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, हिंदी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित क...
























