एक दिन ज़रूर होगा
दामोदर विरमाल
महू - इंदौर (मध्यप्रदेश)
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ये एक दिन में नही होगा मगर एक दिन ज़रूर होगा।
मेरे अपनो को भी मुझ पर बेइंतहा गुरुर होगा।
उड़ने की कोशिश में हूँ बिना पंखों के आसमान में,
हौसलों ने दिया साथ तो छा जाऊंगा जहान में,
मेरी नज़्म का एक दिन, तुम्हारे होठों पर सुरूर होगा...
ये एक दिन में नही होगा मगर एक दिन ज़रूर होगा।
चलता ही रहता हूँ अपनी मंज़िल की तलाश में,
आलोचक बहुत है मगर होता नही निराश में,
देखना एक दिन आयेगा, जब दामोदर मशहूर होगा...
ये एक दिन में नही होगा मगर एक दिन ज़रूर होगा।
कोई कहता है तू तो पागल हो गया है,
ना जाने कोनसी दुनिया मे तू खो गया है,
ये तो मेरा ख़्वाब है, कोई दौलत नही जो गुरुर होगा...
ये एक दिन में नही होगा मगर एक दिन ज़रूर होगा।
सर्वरस धारा का एक दरिया है ये,
दिल की बात कहने का ज़रिया है ये,
मैं तो यूँ ही लिखता रहूंगा, अगर तुम्हे मंजूर होगा......




















