प्रियेतमा
विमल राव
भोपाल म.प्र
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मन की निर्मल पावन उज्जवल
विमल प्रेम रस पाती कों
प्रियेतमा तुम भूल ना जाना
अपनें जीवन सांथी कों
जेसे नभ चर गगन बिना मृत
जलचर अमृत नीर बिना
तेसे तुम बिन मन तड़फत हैं
प्रांण जाए नही पीर बिना
तुम रूठी तों सबकुछ रूठा
कलम सुहाय ना पाती कों
प्रियेतमा तुम भूल ना जाना
अपनें जीवन सांथी कों
जान सका ना मैं भी तुमको
तुम भी मुझको समझ ना पाई
ना जाने क्यों प्रेम विवश हों
मैने तुम संग प्रीत लगाई
अपनें मन की विरह आग में
झोंक रहा हूँ बाती कों
प्रियेतमा तुम भूल ना जाना
अपनें जीवन सांथी कों
मन के घौर अंधेरों में तुम
दिव्य रोशनी लायी थी
जो कुटिया थी टूटी फूटी
तुमने महल बनाई थी
अब तुम मुझसे क्यों रूठी हों
प्रति उत्तर दो पाती कों
प्रियेतमा तुम भूल ना जाना
अपनें जीवन सांथी कों
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परिचय :- विमल राव सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रदेश सचिव अ.भा.वंशावली संरक्...
























