भोले पंछी
मीना भट्ट "सिद्धार्थ"
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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भोले पंछी क़ैद किए सब,
निर्मम हुआ शिकारी।
पश्चिम की चलती आँधी में,
पूनम रातें कारी।।
गईं काल के मुँह निष्ठाएँ,
चुप दर्शक भी सारे।
अंतहीन पीड़ा मानव की,
घूम रही मन मारे।
प्रजातंत्र की बलिहारी है,
सोते खद्दरधारी।
रोज़ समस्या नई खड़ी है,
करता हृदय क्रंदन।
उल्टी चली हवाएं सारी,
मरता प्यासा मधुवन।
पत्थर ही पत्थर राहों में,
तपती सड़कें सारी।
रही बदलती नित्य नीतियाँ,
लुटती है रजधानी।
नारों का हर तरफ़ शोर है,
करते सब मनमानी।।
चौसर के खेलों पर अब भी,
लगे दाँव पर नारी।
परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ"
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सुमित्रा पाठक
पिता : स्व. हरि मोहन पाठक
पुत्र : सौरभ भट्ट
पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट
पौत्री : निहिरा, नैनिका
सम्प्र...























