आजाद परिंदे
सूर्यपाल नामदेव "चंचल"
जयपुर (राजस्थान)
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ख्वाबों के जब आजाद परिंदे
हकीकत के आसमानों में उड़ते है।
बेखौफ कल्पनाओं को सच करने
कदम बड़ा चलो कुछ नया करते हैं।
वृक्ष लगा सब हरियाली करते
सुबह शाम जल सींचा करते हैं।
अनाथ बचपन सींचे खुशियां भरते हैं
कदम बड़ा चलो कुछ नया करते हैं।
रिश्ते ही चहुंओर खुदगर्ज यहां पर
अपने ही खुद अपनों से जलते है।
द्वेष भूल अपनो के हम गले मिलते हैं
कदम बड़ा चलो कुछ नया करते हैं।
वृद्धों की अभिलाषाएं मरती
एकाकी जीवन में घड़ियां गिनते हैं।
कुछ वक्त गुजार अनुभव सुनते हैं
कदम बड़ा चलो कुछ नया करते हैं।
परिचय :- सूर्यपाल नामदेव "चंचल"
शिक्षा : एम ए अर्थशास्त्र , एम बी ए ( रिटेल मैनेजमेंट)
व्यवसाय : उद्यमी, प्रबंधन सलाहकार, कवि, लेखक, वक्ता
निवासी : जयपुर (राजस्थान) ।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित...


















