आई है होली
मीना भट्ट "सिद्धार्थ"
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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मुख पे लाल गुलाल लगाने, आई है होली।
तन की सारी पीर मिटाने आई है होली।।
हाथ गुलाल अबीर रखी है, पुलकित गोपाला।
राधे पर है जादू डाला, कान्हा काला।।
गंधिल होता गात गोपियाँ, भरतीं किलकारी।
सपने लाख सँजोती मन में, आँखें कजरारी।।
वादे सारे आज निभाने, आई है होली।
रंग बिरंगे सुमन खिले हैं, नवरंगी छाया।
मारे कलियों को पिचकारी, भौंरा बौराया।।
हर्ष उल्लास की होली है, फागुन है भाता।
यौवन और बुढ़ापा दोनों, गीत मिलन गाता।।
हमजोली पर प्रेम लुटाने, आई है होली।
है त्योहार अनूठा साजन, प्रेमिल अभिलाषा।
कंचन जैसा रूप चमकता, कहता मन भाषा।।
धरती पर यौवन छाया है, रसिया नभ छैला।
प्रमुदित किंशुक है उपवन में, मिलती है लैला
अंतर्मन कचनार खिलाने, आई है होली।
बरजोरी करते हुरियारे, प्रणय-मुरारी हैं।
ग्रामों की चौपालो ...

















