शगुनी-सा लगे विश्वास
गोविन्द सरावत मीणा "गोविमी"
बमोरी, गुना (मध्यप्रदेश)
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मतलबी हुए लोग यहां,
खुदगर्ज हुआ ज़माना ,
रह गया दुनिया मे शेष,
फ़क्त नाम का याराना।।
छल-कपट में सना हुआ,
लगता है पावन प्यार,
कहां कृष्ण-सी करुणा,
कहां कर्ण-सा व्यवहार।।
वादे तो करते कई,
हर मुश्किल में साथ देने के,
पर लेते खींच हाथ,
आते लम्हे जब हाथ देने के।।
टुकड़ों-टुकड़ों में वट चुका
सु-भाव-ओ-सहयोग,
झरते नही अश्रु नयनों से
होता देख अव वियोग।।
मन की सौम्य बगिया से,
गायब हुई स्नेह सुवास,
दुर्योधन-सी हुई दीनता,
शगुनी-सा लगे विश्वास।।
सिमट रहा रिश्तों-से,
त्याग,समर्पण, शिष्टाचार,
अधरों पर अर्धनग्न हंसी,
करें उर से प्रश्न हजार।।
आ गए हम कहां 'गोविमी',
स्वार्थ में होकर अंधे,
आओ करें अवगुणों से तौबा,
छोड़ें कुटिल धंधे।।
परिचय :- गोविन्द सरावत मीणा "गोविमी"
निवासी : बमोर...



















