आम बजट २०२१
आशीष तिवारी "निर्मल"
रीवा मध्यप्रदेश
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लोक-लुभावन वादे जिसमें दाना, चारा नहीं,
यह आम बजट तो आमजन का प्यारा नहीं।
बजट के गजट का दिमागी बुखार तो उतरा,
अन्नदाता के सिर का बोझ तुमने उतारा नहीं।
छोड़ कर शीशमहल झुग्गियों में आओ साहब
कोई दिन तुमने ऐसा अभी तक गुजारा नहीं।
दुखों का सारा तूफान झेल रहा आम आदमी,
वरना आंखों से बहती यूं ही अश्क धारा नहीं।
जिनकी वेतन लाखों में उनको सारी सुविधाएं
मध्यमवर्ग के लिए सोचा और विचारा नहीं।
इस्तेमाल किया करते हो आम आदमी का,
आम आदमी बर्फ जैसा होता है अंगारा नहीं।
गरीबों की रोटियां छीन रहे डंके की चोट पे,
खुदा होगा वो किसी और का हमारा नहीं।।
परिचय :- आशीष तिवारी निर्मल का जन्म मध्य प्रदेश के रीवा जिले के लालगांव कस्बे में सितंबर १९९० में हुआ। बचपन से ही ठहाके लगवा देने की सरल शैली व हिंदी और लोकभाषा बघेली पर लेखन करने की प्रबल इच्छाश...


















