किताबें
संजय वर्मा "दॄष्टि"
मनावर (धार)
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किताबें भी कहती हैं शब्दों में
हमसे कुछ ज्ञान पाते रहो
हमें भी अपने घरो में फूलो कि तरह
बस यूँ ही तुम सजाते रहो
किताबें बूढी कभी न हो तो इश्क कि तरह
ये ख्यालात दुनिया को दिखाते रहो
कुछ फूल रखे थे किताबों में यादों के
सूखे हुए फूलो से भी महक
ख्यालो में तुम पाते रहो
आँखें हो चली बूढी फिर भी
मन तो कहता है पढ़ते रहो
दिल आज भी जवाँ किताबों की तरह
पढ़कर दिल को सुकून दिलाते रहो
बन जाते है किताबों से रिश्ते
मुलाकातों को तुम ना गिनाया करों
माँग कर ली जानें वाली किताबों को
पढ़कर जरा तुम लौटाते रहो
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परिचय :- संजय वर्मा "दॄष्टि"
पिता :- श्री शांतीलालजी वर्मा
जन्म तिथि :- २ - मई -१९६२ (उज्जैन)
शिक्षा :- आय टी आय
व्यवसाय :- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग )
प्रकाशन :- देश - विदेश की विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में रचनाएँ व समाचार पत्रों में निरंतर पत्र और ...























