अभिनंदन वसंत का
श्रीमती शोभारानी तिवारी
इंदौर म.प्र.
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मंद मंद शीतल पवन है,
फूलों से भरा चमन है,
खुश है धरा, खुश नीलगगन है,
वसंत तुम्हारा अभिनंदन है.....
जब प्रकृति ने ली अंगड़ाई,
चहुं ओर छटा अलौकिक छाई,
बसंती चोला पहना धरती ने,
दुल्हन जैसी वह शरमाई,
घुल रहा नशा नस-नस में,
बहका-बहका सावन है।
वसंत तुम्हारा अभिनंदन है.....
उषा के किरणों की लाली,
लहराते फसलों की बाली,
हाथों में पूजा की थाली,
कोयलिया गाये मतवाली,
खुशबू से महका उपवन है ,
वसंत तुम्हारा अभिनंदन है.....
भंवरे के दिलकश तराने से,
मन में सारंगी सी बजती,
रोम-रोम पुलकित हो जाता,
धड़कने तेजी से चलती ,
पतझड़ का मौसम आनंदित होकर,
बहारों को देता निमंत्रण है,
वसंत तुम्हारा अभिनंदन है.....
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परिचय :- श्रीमती शोभारानी तिवारी इंदौर म.प्र.
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