जाड़े की दस्तक
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कंचन प्रभा
दरभंगा (बिहार)
जाड़े की धूप खिलने लगी है।
जाड़े की धुँध उठने लगी है।
छत पर रजाईयाँ सजने लगी है।
आँगन में चटाईयाँ बिछ्ने लगी है।
रंग बिरंगे फूल खिलने लगी है।
तितली फूलों पर उड़ने लगी है।
पत्तों पर ओस चमकने लगी है।
सिंगरहार पेड़ों पर सजन लगी है।
आँगन में आचार सूखने लगी है।
दरवाजे दरीचे खलने लगे हैं।
माँ भाभियाँ स्वेटर बुनने लगी हैं।
शायद जाड़ें की दस्तक मिलने लगी है।
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परिचय :- कंचन प्रभा
निवासी - लहेरियासराय, दरभंगा, बिहार
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