आजाद हो गये
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रचयिता : राम शर्मा "परिंदा"
कई धर्म - जातियाँ कई वाद हो गये ।
हे ! चन्द्रशेखर, हम आजाद हो गये ।।
कदर नहीं बलिदान की
चिंता धन और मान की
भीतर से सब काफिर है
बातें कर रहे हैं शान की
स्वतंत्रता के नाम पर बरबाद हो गये ।
हे ! चन्द्रशेखर, हम आजाद हो गये ।।
भूल गये निज संस्कृति
हर जगह हो रही अति
कहने को है पढ़े-लिखे
मति बन रही है कुमति
मानव के नाम पर अपवाद हो गये ।
हे ! चन्द्रशेखर, हम आजाद हो गये ।।
परिचय :- नाम - राम शर्मा "परिंदा" (रामेश्वर शर्मा) पिता स्व जगदीश शर्मा आपका मूल निवास ग्राम अछोदा पुनर्वास तहसील मनावर है। आपने एम काम बी एड किया है वर्तमान में आप शिक्षक हैं आपके तीन काव्य संग्रह १ परिंदा, २- उड़ान, ३- पाठशाला प्रकाशित हो चुके हैं और विभिन्न समाचार पत्रों में आपकी रचनाओं का प्रकाशन होता रहता है, दूरदर्शन पर काव्य पाठ के साथ-साथ आप मंचीय कव...





















