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कविता

सपने सजाये बैठा हूँ
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सपने सजाये बैठा हूँ

प्रमेशदीप मानिकपुरी भोथीडीह, धमतरी (छतीसगढ़) ******************** दिल मे कितना बोझ लिये बैठा हूँ दिल मे दर्द के सैलाब लिए बैठा हूँ बहुत दूर तलक है अंधेरा ही मगर पर उम्मीदों की दिये जलाये बैठा हूँ अंधेरा भी मिट जायेगा एक दिन बाहरें फिर लौट आयेगी एक दिन एक दिन आयेगी रौशनी कंही से मन को अब ये समझाये बैठा हूँ रात के बाद दिन का आना तय है दुख के बाद सुख का आना तय है आयेगी नूतन किरण अब नभ से अब सूरज से नजर मिलाये बैठा हूँ अरमानो से सजी सब रातें होंगी खुशियों की नित अब बातें होंगी हर दिन होगी खुशियों का मेला मन मे यह विश्वास जगाये बैठा है कितने सपने भी अब टूट रहें है कितने अपने भी अब छुट रहें है टूटती तारों संग जाने क्यों कर नवीनतम सपने सजाये बैठा हूँ परिचय :- प्रमेशदीप मानिकपुरी पिता : श्री लीलूदास मानिकपुरी जन्म : २५/११/१९७८ निवासी : आमाचानी पोस्ट- भोथीडीह जिला- ...
अंतिम संस्कार
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अंतिम संस्कार

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** नाम बदलिये अपने महत्वपूर्ण संस्कारों के साहबानों, सिर्फ मुझे पता है आपके संस्कारों के नाम पर अब तक कितना लुटा चुका हूं, अपनी जमीन भी गंवा चुका हूं, मृत्यु पूर्व इलाज कराना मेरा फर्ज़ था, मृतक के दिए जीवन का चुकाना कर्ज़ था, मृत्यु के दिन, जोर देकर सभी की उपस्थिति में आपने कहा था ये अंतिम संस्कार जरूरी है, किया मैंने अंतिम संस्कार, जिसके लिए कर दिया था और भी जरूरी कार्यों को दरकिनार, विधान कह करवा सम्पूर्ण श्रृंगार, कहा कर लो आखिरी दीदार, मिट्टी कार्य के बाद तीसरे और दसवें दिन फिर करने पड़े थे कुछ संस्कार, जिसे आपने नाम दिया है मृत्युभोज, अब तक हैरान हूं ये है किसकी खोज, गांव, परिवार, रिश्ते नाते सबको खिलाया, घर के अंतिम दाने को भी मिलाया, बड़ी मुश्किल से कुछ महीनों में जिंदगी को पटरी पर ला ...
मेरी कामना
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मेरी कामना

हितेश्वर बर्मन डंगनिया, सारंगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** हे नारी तुम नि:संदेह बहुत शक्तिशाली हो, हजारों मर्दों की भीड़ भी तुम्हें देखकर खामोश हो जाती है। इतिहास में एक वीरांगना लक्ष्मीबाई ऐसी भी थी, जिसके सिर्फ ख्यालों से ही पूरी नारी जाति जोश में आ जाती है। हे नारी तुम बहुत ही भाग्यशाली हो, सभी व्रतों, त्यौहारों में सिर्फ तुम ही उपवास रहती हो। सभी धर्मों, परंपराओं को मर्दों ने ही बनाया है, लेकिन तुम ही परंपराओं को निभाती रहती हो। हे नारी तुझमें बहुत सहनशीलता है, तुमनें सदियों से बहुत यातनाएं झेली है। कभी सती प्रथा के नाम पर चिता में जिंदा जली है, तो कभी दहेज के नाम पर प्रताड़ना झेली है। हे नारी तुम्हारे भीतर असीम शक्ति छिपी हुई है, तुम्हें अपनी शक्ति को नये आयाम के साथ गढ़नी होगी। आज दिन पर दिन तुम पर अत्याचार हो रहें है, अपने स्वाभिमान के ...
पापा
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पापा

निरुपमा मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** लड़खड़ा कर गिरा पहली बार जब मैं, तुमने बाहें बढ़ाकर संभाला मुझे; उंगली थामी थी तुमने मेरी ज़ोर से, फिर गिरने से पहले उठाया मुझे। लड़खड़ा ...... घोड़ा बनने को जब मैंने तुमसे कहा, तुमने पीठ पर अपनी मुझको चढ़ाया; हराया था मैंने दोस्त को दौड़ में, मेरे बस्ते को तब तुमने उठाया। लड़खड़ा ...... कंटक भरी राह पर चलना सिखाया, तुमने उड़ना सिखाया सपनों को मेरे; पहचान कराया स्वाभिमान से मेरा, मेरा अभिमान हो पापा तुम मेरे। लड़खड़ा ..... मैं खड़ा जब हुआ अपने पैर पर, सोचा बोझ तुम्हारा कुछ कम करूं; तुम बोले कि मैं हूं पापा तेरा, अब मित्र बनकर सदा हम रहें। लड़खड़ा ...... आयु ने पापा को कभी छेड़ा नहीं, कंधे उनके अभी भी झुके ही नहीं; मेरे बेटे के साथ लगाते ठहाका, मैं किनारे खड़ा मुस्कुराता रहा। लड़खड़ा .... ...
बेटी
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बेटी

डॉ. किरन अवस्थी मिनियापोलिसम (अमेरिका) ******************** अनचाही होकर भी बेटी मन को सम्मोहित कर लेती है उसकी नन्हीं चितवन ही अनचाही को चाही कर देती है ह्रदय मर्म को छूनेवाली वही एक नारी है किन्तु भावनाशून्य पिता को वही एक भारी है बेटी न केवल पुत्री है रमा, शारदा, वह दुर्गा है बलिदान, त्याग, ममता की मूर्ति अमित सौहार्द, सहनशक्ति गृहलक्ष्मी बन असहज क्षणों में सखी-सहेली बन जाती है माँ बन वह ममता का सारा कोष लुटाती है भगिनी बनकर स्नेहसूत्र में बाँध सभी को लेती है पत्नी बन वह न्योछावर साँसें अपनी कर देती है। शिक्षित होकर वह माँ सरस्वती बन जाती है प्रश्न उठे गृहरक्षा का जब दुर्गारूप वह धर लेती है इसीलिए वरदान है बेटी मात-पिता का मान है बेटी दो कुलों की तारक है अतुल शक्ति की खान है बेटी। जयहिन्द जय हिन्द की बेटी परिचय :- डॉ. किरन अवस्थी...
सुधार में पाठ्यक्रम
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सुधार में पाठ्यक्रम

प्रीति शर्मा "असीम" सोलन हिमाचल प्रदेश ******************** भारतीय समाज के सुधार में ... आठवीं कक्षा के पाठ आठ में ... हिंदू पुराणिक कथाओं का, व्याख्यान किया जा रहा है। सती को दक्ष की, पत्नी बताया जा रहा है। इतने से भी सुधारकों का मन नहीं भरा जब। सती प्रथा को सती से जोड़कर जोहर बताया जा रहा है। पुराणों की यह कैसी ... कथाएं बता रहे हैं। विद्यार्थियों में कैसे भ्रम उठाए जा रहे हैं। सिलेबस में इस तरह जोड़ कर पुराणों को अपनी समझ से तोल कर। शिव पुराण कथा में ... काश सती-महादेव को थोड़ा-सा टोटोल कर। सती दक्ष की पत्नी नहीं पुत्री थी। पौराणिक कथाओं को मनगढ़ंत कहानी बोल कर। भारतीय सभ्यता को हर दौर में अपनी गलतियों को सुधारने के लिए बुद्धिजीवी सुधार करते रहे। इतिहास को इस तरह से जोड़ा की सभ्यता का विनाश करते रहे।। परिचय :- प्री...
उनकी याद में …
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उनकी याद में …

बृजेश आनन्द राय जौनपुर (उत्तर प्रदेश) ******************** उनकी याद में ऑखें लगी, बरसात हो गई! बीते सपनों से मुझे जगा, ये 'रात' सो गई !! यही रात जो प्यासे जग की किस्से सुनती थी यही रात जो चॉदनियों में हॅस-हॅस मिलती थी यही रात कि जिसमें छत पे पायल छमके थे यही रात जो अभिसारों में खोकर रहती थी यही रात आज ऑसुओ की लड़ियॉ पिरो गईं! बीते सपनों से मुझे जगा, ये रात सो गई!! यही रात जिसमें सब-लुटकर तुमको पाया था यही रात जिसमें गीतों-से हृदय सजाया था यही रात जिसमें अम्बर में तारे बिखरे थे यही रात, रूप से तेरे, हम भी निखरे थे यही रात आज हर सुख पे संघात हो गई ! बीते सपनों से मुझे जगा, ये रात सो गई !! यही रात है जिसमें तुमको अपलक देखा था यही रात है जिसने तुमसे विधि को लेखा था यही रात में रूपवती इक सजनी सोई थी यही रात है जिसने मीठी यादें बोई थी यही रात आज विरहों-भरी इक...
झुटी मुस्कान
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झुटी मुस्कान

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** मन रोता है कहीं किसी कोने में कहीं तनहाई मुंह चिढ़ाती है कब तक पैबंद लगाएं झूठी मुस्कान के जिंदगी रीति-रीति बीती जाती है। कहने को बहुत कुछ है, लब खुलते नहीं देखी अपनों की जिंदगी गिरेे हुए फ़ूल उठाता नहीं कोई। परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्रसारित होती रहती हैं व वर्तमान में इंदौर लेखिका संघ से जुड़ी हैं। घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, ...
चुनाव और प्रत्याशी
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चुनाव और प्रत्याशी

डॉ. रमेशचंद्र मालवीय इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** मुझ प्रत्याशी की सुनो, वो तुम्हारी सुनेगा तुम एक वोट दोगे, वो दस नोट देगा। भूख लगे तो खाना खाना प्यास लगे तो पानी पीना नोट इसलिए देता हूँ कि वोट से है मेरा मरना जीना नोट के बदले वोट ही देना और कोई तुम चोट न देना। माना कि तुम वोट के खातिर अपनी अकड़ दिखाओगे बोतल-कम्बल तो दूंगा ही जो मांगोगे, वो सब पाओगे वोट चाहिए मुझे तो केवल और कोई तुम खोट न देना। पक्के घर मैं दिलवा दूंगा बिजली पानी मिल जाएगा एक वोट के बदले प्यारे जीने का सुख मिल जाएगा यह चुनाव का सीज़न है तुम बाद़ाम अख़रोट न देना। तुम ही मेरे माई बाप हो तुम ही मेरे भाग्यविधाता हाथ जोड़ता पांव में पड़ता और झुकाता अपना माथा अच्छी खासी जीत दिलाना भागते भूत लंगोट न देना। परिचय :- डॉ. रमेशचंद्र मालवीय निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प...
बुढ़ापा
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बुढ़ापा

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** गुज़रा ज़माना नहीं, वर्तमान भी होता है बुढ़ापा, सचमुच में चाहतें, अरमान भी होता है बुढ़ापा। केवल पीड़ा, उपेक्षा, दर्द, ग़म ही नहीं, असीमित, अथाह सम्मान भी होता है बुढ़ापा। ज़िन्दगी भर के समेटे हुए क़ीमती अनुभव, गौरव से तना हुआ आसमान भी होता है बुढ़ापा। पद, हैसियत, दौलत, रुतबा नहीं अब भले ही, पर सरल, मधुर, आसान भी होता है बुढ़ापा। बेटा-बहू, बेटी-दामाद, नाती-पोतों के संग, समृध्द, उन्नत ख़ानदान भी होता है बुढ़ापा । मंगलभाव, शुभकामनाएं, आशीष, और दुआएं, सच में इक पूरा समुन्नत शुभगान भी होता है बुढ़ापा। घुटन, हताशा, एकाकीपन, अवसाद और मायूसी, गीली आँखें पतन, अवसान भी होता है बुढ़ापा । संगी-साथी, रिश्ते-नाते, अपने-पराये मिल जायें यदि, तो खुशियों से सराबोर महकता सहगान भी होता है बुढ़ाप...
कोशिश कर …
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कोशिश कर …

महेन्द्र साहू "खलारीवाला" गुण्डरदेही बालोद (छत्तीसगढ़) ******************** फासले भी गुजर जाएंँगे, मंजिल भी मिल जाएगा। कोशिश कर जीवन में, हर समस्या का हल पाएगा। हार न मान ,उदास न बैठ, तुम्हारा भी जरूर नाम होगा। कोशिश कर, हर बाधा से, जूझना आसान काम होगा। आंँधियों का दौर चलता रहेगा, इस जीवन चक्र में। मरूभूमि की तपिश सहन कर, जीवन भी आसान होगा। राह भटकाने वाले भी, मिलते रहेंगे इस जगत में। अडिग रह लक्ष्य पर, जरुर तुम्हारा मुकाम होगा। कोशिश से ही जीवन में, हर काम आसान होगा। जीवन का फलसफा सीख, तेरा पथ आसान होगा। आसमां पर उड़ने वाले, परिंदे अपना हुनर जानते हैं। कोशिश कर, उन परिंदों की भांँति, गगन अवश्य तुम्हारा होगा। परिचय :-  महेन्द्र साहू "खलारीवाला" निवासी -  गुण्डरदेही बालोद (छत्तीसगढ़) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाध...
गिद्ध भोज
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गिद्ध भोज

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** गिद्ध बड़े मजे से दावत उड़ाते हैं, बिना मेहनत से मिला खाते हैं, आज भी गिद्धों की बैठक हो रही है, बैठक भी वहीं जहां मिल गया गोश्त, आज झगड़ा भी नहीं सभी हैं दोस्त, आज तो बस जाम और साकी है, ऐसा खाये कि केवल हड्डी बाकी है, सबने देखा आज फिर कोई मरा है, हमारे लिए मैदान हरा ही हरा है, मगर ये क्या? इस मरने वाले को तो चार लोग कंधे पर उठाए हैं, आगे व पीछे भीड़ लगाए हैं, गिद्ध निराश हो गए, कई तो उदास हो गए, तब वृद्ध गिद्ध ने बोला, भाइयों इसका मांस हम नहीं खा सकते, क्योंकि ये इंसान है, ये अपने पीछे होने वाले नोचपने से अंजान है, इसे तो अभी जलाएंगे या दफ़नायेंगे, फिर कुछ दिनों के लिए ये सब गिद्ध बन जाएंगे, अब ये मरने वाले का शरीर नहीं नोचेंगे, बल्कि उनके परिवार वालों को नोचेंगे, हम तो वातावरण सा...
डिजीटल पर मानव अटल
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डिजीटल पर मानव अटल

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** आज का आधुनिक युग मानव कदापि रहा न रुक बेहिसाब काम के बोझ में डिजीटल में गया खुद झुक ।। डिजीटल क्या आ गया युग का दैनिक बदला काम कर लिया सब खूब आसान खूब बदल लिया काम ।। डिजीटल पर भरोसा फर्स्ट डिजीटल पर खूब है व्यस्त डिजीटल प्यारा घर परिवार सगे सम्बन्धी पड़ोसी का कोरा दिखावटी है स्नेह प्यार ।। है डिजीटल कहता है मानव खुद खुश व्यस्त और मस्त कौन है अपना कौन पराया डिजीटल का है स्वाद पाया मानव का मन डिजीटल ने चुंबक से ज्यादा चिपकाया ।। दुख सुख की सारी चिंता का डिजीटल को दुख दर्द बताया दुनिया में मानव खुद मानव से जिंदगी को डिजीटल है बनाया ।। शिक्षित क्या अशिक्षित कलम कागज छोड़ा हाथ के बजाय सबकुछ डिजीटल के भरोसे नोकरी व्यापार कारोबार डिजीटल से उपार्जन रोजगार दो जून रोटी जुगाड़ करने समूचा रिश्ता न...
पितर हमारे
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पितर हमारे

डॉ. कोशी सिन्हा अलीगंज (लखनऊ) ******************** पितृ पक्ष में सारे पितर हमारे आशीषों संग धरा पर हैं पधारे स्वागत है मन -प्राण व आत्मा से उनके प्रेम से हृदय हमने हैं सँवारे शुभ्र स्नेह व आशीषों से भरे हम जीते हैं उनकी स्मृतियों के सहारे प्रतिदान उनके‌ दान का है असंभव भाव-सुमन अर्पित, फल्गु के किनारे उनके बताये आदर्शों पर चलकर हम बनायें उन्हें, सदा ही परम सुखारे। परिचय :- डॉ. कोशी सिन्हा पूरा नाम : डॉ. कौशलेश कुमारी सिन्हा निवासी : अलीगंज लखनऊ शिक्षा : एम.ए.,पी एच डी, बी.एड., स्नातक कक्षा और उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं में अध्यापन साहित्य सेवा : दूरदर्शन एवं आकाशवाणी में काव्य पाठ, विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में गद्य, पद्य विधा में लेखन, प्रकाशित पुस्तक : "अस्माकं संस्कृति," (संस्कृत भाषा में) सम्मान : नव सृजन संस्था द्वारा "हिन्दी रत्न" सम्मान से सम्मानित, मु...
करवा चौथ
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करवा चौथ

सोनल मंजू श्री ओमर राजकोट (गुजरात) ******************** भूख नहीं लगती है स्त्री को, करवाचौथ निभाने में, चाहे कितनी देर लगा ले चाँद आज नज़र आने में, उम्र बड़ी होगी या नही ये तो किसी को पता नहीं, आशा है प्यार बढ़ ही जायेगा यूँ त्याग दिखाने में।। आज जी भर संवरती, सोलह श्रृंगार करती है, सज के सुर्ख जोड़े में चाँद का दीदार करती है, उपहार मिले या ना मिले उसे कोई परवाह नहीं, पति की चाहत मिले, इसी का इंतजार करती है। तुम्हारा नाम अपनाती है उसका मान बन जाना तुम, जहाँ पर पा सके सुकूं ऐसा विश्राम बन जाना तुम, परीक्षा प्रेम की दे देगी चुनेगी जंगलों के काँटे भी, पत्नी गर सीता बन जाती है तो राम बन जाना तुम।। परिचय - सोनल मंजू श्री ओमर निवासी : राजकोट (गुजरात) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप...
मतलब के रिश्ते-नाते है
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मतलब के रिश्ते-नाते है

प्रमेशदीप मानिकपुरी भोथीडीह, धमतरी (छतीसगढ़) ******************** धन दौलत तक माँ बाप से नाता है सबल होते ही तोड़े सब से नाता है अंत मे सब छोड़कर चले जाते है मतलब के सब रिश्ते और नाते है दौलत हो तो सब के रिश्तेदार है गरीब का कब कहाँ कोई यार है गरीबो से लोग रिश्ते भी छुपाते है मतलब के सब रिश्ते और नाते है अपना-अपना सब को कहते है पर पीड़ा अपने तक ही रहते है वक्त पड़े कोई साथ नहीं आते है मतलब के सब रिश्ते और नाते है लोग आते है और लोग जाते है जग मे निज-निज धर्म निभाते है कितने लोग जीवन मे ऐसे आते है मतलब के सब रिश्ते और नाते है परिचय :- प्रमेशदीप मानिकपुरी पिता : श्री लीलूदास मानिकपुरी जन्म : २५/११/१९७८ निवासी : आमाचानी पोस्ट- भोथीडीह जिला- धमतरी (छतीसगढ़) संप्रति : शिक्षक शिक्षा : बी.एस.सी.(बायो),एम ए अंग्रेजी, डी.एल.एड. कम्प्यूटर में पी.जी.डिप्लोमा रूचि : काव्य लेखन, ...
दर्ज ना हो …
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दर्ज ना हो …

डॉ. अवधेश कुमार "अवध" भानगढ़, गुवाहाटी, (असम) ******************** फाड़ दो सब चिट्ठियाँ, कॉपी, किताबें, दर्ज ना हो देश का अभिमान जिसमें। काट दो इतिहास से वे पेज सारे, दर्ज ना हो वीरता - बलिदान जिसमें। खून के बदले मिला हमको तिरंगा, मत समझना मुफ़्त की सौगात है ये- तोड़ दो गद्दार के हर बाजुओं को, दर्ज ना हो हिंद - हिंदुस्तान जिसमें।। परिचय :- डॉ. अवधेश कुमार "अवध" सम्प्रति : अभियंता व साहित्यकार निवासी : भानगढ़, गुवाहाटी, (असम) शपथ : मेरे द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि मेरी यह रचना पूर्णतः मौलिक, स्वरचित और अप्रकाशित हैं। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कह...
सहनशक्ति का पर्याय लहर
कविता

सहनशक्ति का पर्याय लहर

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** क्यों टकराती हो कूल से जानती हो ना तुम्हें लौटना होगा पुनः पवन के थपेड़े खाने के लिए तुम लहर हो, नारी हो सहन शक्ति का पर्याय बनो। तड़ाग के स्थिर जल में तुम्हें बहना नहीं टकराकर पुनः लौटना है प्रत्यागमन कर पवन के साथ अटखेलिया करते समय बीतता है बीच-तड़ाग के बीच में ही तड़ाग तुम्हें छोड़ देगा कूल के लिए। तुम जानती नहीं, ना समझ पाती हो पवन, पानी का वार्तालाप जो स्वयं के सुख के लिए तड़ाग के सौंदर्य के लिए तुम्हें टकराने के लिएं कूल तक भेजते हैं। दूर बहुत दूर से तुम्हें छटपटाता देख उल्लासित हो पवन, पानी मिलकर तुम्हें धकेलते है अपनी सुंदरता के लिए प्रकृति प्रेमी को उल्लसितकरने के लिए उसे गुनगुनाने, कलम चलाने को बाध्य करते हैं ताकि साहित्य नया रचा जा सके जो जन् मानस में स्फुरण भर सके।। ...
हिन्दी
कविता

हिन्दी

बृजेश आनन्द राय जौनपुर (उत्तर प्रदेश) ******************** उत्तर, दक्षिण ,पूरब, पश्चिम, एक सभी का नारा 'हिन्दी' भारत में जनमन की 'जीवन-शिक्षा-धारा'।। सर्व-प्राचीना-संस्कृत-जननी भगिनी जिसकी सब भारत भाषा दर-दर की बोली 'शिशु-सरल' निर्मल जिसकी मातृ अभिलाषा इन बोली, उपभाषा में बसता प्राण हमारा हिन्दी भारत में जनमन की 'जीवन-शिक्षा-धारा'।। माँ की लोरी, पिता का गान गिनती, पहाड़ा,अक्षर-ज्ञान कविता, कहानी और विज्ञान विकसित-सोच-समझ-अनुमान मातृभाषा में ही अपने- पलता संस्कार हमारा हिन्दी भारत में जनमन की- 'जीवन-शिक्षा-धारा'।। अंग्रेजी, फ्रेंच, इटाली, जर्मन रूसी, चीनी, कोरियाई, बर्मन हित्ती, ग्रीक, युनानी, रोमन अल्बानी, तुर्की, फारसी, अर्बन होंगी बहुत सी भाषाएँ पर हिन्दी सबसे मधुरा-प्यारा हिन्दी भारत में जनमन की- 'जीवन-शिक्षा-धारा'।। ब्रज, बुन्देली, कौरवी...
यादें
कविता

यादें

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** ज़ख्म हरे होने में देर नहीं लगती यादों को कूरेदोगे तों अश्क निकल आएंगे यादों का सैलाब पीछा नहीं छोड़ता है तुम से कारवां कारवां से सैलाब बन जाओ, यादों को जश्न सा मनाओ यारों बीत गया सो रित गया आगे बढ़ो नये आयाम थामो। जेहनं में जिंदगी के फलसफे लिखे हैं l इन फलसफो का इतिहास बनाओं यारों।। परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्रसारित होती रहती हैं व वर्तमान में इंदौर लेखिका संघ से जुड़ी...
गाँधी जी का रूप निराला
कविता

गाँधी जी का रूप निराला

किरण पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** गाँधी जी का रूप निराला, गमछा लकडी चश्मा काला। शान्ति से क्रान्ति तुम करते, सविनय, दाण्डी, अग्रेंजो तुम भारत छोड़। राष्ट्र पिता भारत के तुम हो, पक्के देश भक्त भी तुम हो, अग्रेंजो की ठठरी बारी, विदेशी कपडो की होली बारी, पहुँचाया सबको निजधाम, भारत माता की जय-जय कार। कितने जुल्म सहे लोगो ने। कितने अत्याचार सहे लोगो ने, हार ना मानी जीते हे आप। विश्व गुरु फिर बनेगा आप। जय हिंद जय भारत। परिचय : किरण पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित ३. १५००+ कविताओं की रचना व भजनो की रचना रूचि : कविता लेखन...
हम डूब जाएं पानी में
कविता

हम डूब जाएं पानी में

डॉ. किरन अवस्थी मिनियापोलिसम (अमेरिका) ******************** (२०१२,२०१३ दामिनी घटनाओं से आहत) देश डूब जाए पानी में तब न होगा रेप, न होंगी हत्याएँ न ही क़त्ल की चर्चा होगी, न ही डाके की घटना होगी। किंतनी गुड़िया आहत होंगी, कितनी देंगी क़ुर्बानी कितनी कलियाँ मुरझाएँगीं, कितने जीवन होंगे पानी पानी। कितनी गुड़िया चीख़ेंगीं, कितनी गुडियां तड़पेंगीं कितनी गुड़िया क़ुरबान चढ़ेंगी, प्रतीक्षा प्रलय की अगवानी में। देश डूब जाए पानी में। न गुड़िया घायल होंगीं, न गुड़िया को ग्लानि होगी न उसकी सिसकी गूँजेंगीं, न भारत की अस्मत पानी होगी गुडियां बच भी जाएँ तो क्या, घायल की गति घायल ही जाने उसके मन में क्रंदन होगा, आग लगे अब पानी में। देश डूब जाए अब पानी में। परिचय :- डॉ. किरन अवस्थी सम्प्रति : सेवा निवृत्त लेक्चरर निवासी : सिलिकॉन सिटी इंदौर (मध्य प्रदेश) वर्त...
बेचारा आवारा
कविता

बेचारा आवारा

राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** थक कर बैठ गया हूँ थोड़े विराम के लिए मगर सोच मत लेना कि मैं जीवन से हार गया हूँ। बदलते रहते हैं जीवन के पड़ाव मगर सोच मत लेना मैं दूसरों के सहारे हो गया हूँ। बदलते हुए जमाने के साथ थोड़ा बदल सा गया हूँ मगर सोच मत लेना कि अब मैं आवारा हो गया। गुमसुम सा रहता हूँ गुमनाम लोगों के बीच मगर सोच मत लेना कि अब मैं बेचारा हो गया। परिचय :- राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा...
निरोगी इंसान
कविता

निरोगी इंसान

संजय वर्मा "दॄष्टि" मनावर (धार) ******************** पंछियों का कोलाहल दुबके इंसान घरों में मुंडेर पर बोलता कौआ अब मेहमान नही आता संकेत लग रहे हो जैसे मानों भ्रम जाल में हो फंसे। नही बंधे झूले सावन में पेड़ों पर उन्मुक्त जीवन बंधन हुआ अलग-अलग हुए अनमने से विचार बाहर जाने से पहले मन में उपजे भय से विचार। क्योंकि स्वस्थ्य धरा निरोगी इंसान बनना और बनाना इंसानों के हाथों में तो है। परिचय :- संजय वर्मा "दॄष्टि" पिता :- श्री शांतीलालजी वर्मा जन्म तिथि :- २ मई १९६२ (उज्जैन) शिक्षा :- आय टी आय व्यवसाय :- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग) प्रकाशन :- देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ व समाचार पत्रों में निरंतर पत्र और रचनाओं का प्रकाशन, प्रकाशित काव्य कृति "दरवाजे पर दस्तक", खट्टे मीठे रिश्ते उपन्यास कनाडा-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व के ६५ रचनाकारों में ले...
गांधी व स्वच्छता
कविता

गांधी व स्वच्छता

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** देश के हर कोने में, जागरूकता में जारी स्वच्छता का वृहत अभियान गाँधीजी के जन्मदिन पर, तूल पकड़ रहा जोरो पर देशभर के हर कोने कोने में स्वच्छता का वृहत अभियान देशवासियों ने हर जगह बढ़ा दिया स्वच्छता का मान सन्मान, स्वच्छता की कमी न रखने का किया जा रहा है, गांव से शहर तक देशभर की जनता में ऐलान जारी है जारी रखो स्वच्छता का यह वृहत अभियान गाँधी जी स्वयं स्वच्छता में बढ़चढ़कर खुद समर्पित रहकर किये योगदान देशवासियो ने अब समझ लिया गाँधी जी ने बताया चलाया स्वच्छता का कितना आवश्यक है काम स्वच्छता का यह वृहत अभियान चपरासी से अधिकारी जुड़कर सफल बना रहा है झाड़ू पकड़कर देशव्यापी स्वच्छता का सफल स्वच्छता का यह वृहत अभियान गाँधी जी के जन्मदिनपर हर गली मोहल्ले में चलता है यह अभियान जोरो पर जुटते है हर तबके के ल...