कुछ बीज धरा पर बो दो
संगीता पाठक
धमतरी (छत्तीसगढ़)
********************
हे मनुज! पेड़ काट कर
कल जो गलती तुमने की थी।
अभी भी वक्त है
कुछ बीज धरा पर बो दो।
नई पौध धरती पर लगाओ।
नई पौध उगा कर गलतियाँ सुधार लो।
अवश्य ही बीज अंकुरित होकर
कल पेड़ बनेगा ।
पंछी नीड़ का निर्माण करेंगे।
तुम्हारे बच्चे पेड़ की छाया तले
विश्राम करेंगे।
परिचय : संगीता पाठक
निवासी : धमतरी (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु ड...





















