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दोहा

मृत्यु से दो-दो हाथ
दोहा, मुक्तक

मृत्यु से दो-दो हाथ

सुधीर श्रीवास्तव बड़गाँव, गोण्डा, (उत्तर प्रदेश) ******************** चलो मृत्यु से हम करें, मिलकर दो-दो हाथ। आपस में सब दीजिए, इक दूजे का साथ। मुश्किल में मत डालिए, नाहक अपनी जान, वरना सबका एक दिन, घायल होगा माथ।। दिल्ली में विस्फोट से, दुनिया है हैरान। इसके पीछे कौन है, सभी रहे हैं जान। मोदी जी अब कीजिए, आर-पार इस बार, नाम मिटाओ दुष्ट का, चाहे जो हो तान।। वो भिखमंगा देश जो, बजा रहा है गाल। शर्म हया उसको नहीं, भूखे मरते लाल। युद्ध सिवा उसको‌ नहीं, आता कोई काम, गलती उसकी है नहीं, पका रहा जो दाल।। हम तो हारे हैं नहीं, कैसे कहते आप। सीट भले आई नहीं, मानें क्यों हम शाप। अभी टला खतरा नहीं, लोकतंत्र से यार, हम भी कहते गर्व से, हुआ चुनावी पाप।। मोदी आँधी में उड़े, खर-पतवारी रंग। सोच-सोच सब हो रहे, गप्पू पप्पू संग। जनता ने ऐसा दिया, चला बिहारी दाँव, जीते-हारे जो सभी, ...
ताला
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ताला

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** अधरों पर ताले लगे, विवश रहें करतार। टूटे जाने मौन कब, पीड़ा बढ़ी अपार।। मौन करें धारण सभी, बनकर मानस-दास। कैसी प्रभु यह चाकरी, ताले में सब आस।। कैसे प्रिय से हो मिलन, ताले लगे निवास। पता नहीं कुछ दे गए, सजनी सतत उदास।। झूठा ही वाचाल है, करे कौन प्रतिकार। मौन खड़ा प्रभु सत्य है, होकर बहु लाचार।। लोकतंत्र बेबस हुआ, संसद बैठी मौन। कर्म सभी अवरुद्ध हैं, खोले उनको कौन।। जीवन सम विश्राम है, वाणी बैठी शांत। मौन स्वरों में बोलता, मनुज हृदय आक्रांत।। कुछ कहना अपराध है, आया संकट काल। बंधक बनी स्वतंत्रता, जलती क्रांति मशाल।। बोलो सदा विचार कर, करते हैं अनुरोध। आकर्षित करती सदा, वाणी सरस अबोध।। नारी शक्ति स्वरूप है, अधर-अधर प्रतिमान। ताले में भी बन्द है, लगती मुक्त विधान।। मौनावस्था भंग कर,...
मीराबाई
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मीराबाई

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** रत्नसिंह की थी सुता, मीराबाई नाम। भोजराज पति नाम था, कृष्ण भक्ति था काम।। मीरा जब विधवा हुई, थामा गिरधर हाथ। मीरा माला जप रहीं, जुड़ीं कृष्ण के साथ।। नैन साँवरे हैं बसे, देखो निश्छल प्रीत। श्याम दर्श की धुन बनी, ढूँढे कान्हा मीत।। प्रभु चरणों में नाचती, गाती मधुरिम गीत। भक्ति बनी पहचान जब, लिया जगत को जीत। मीरा जोगन श्याम की, तजी लोक की लाज। सतत उपासक कृष्ण की, भूल गयी सब काज।। प्रेम डोर मीरा बँधीं, नेह जगत आधार। मीरा के कान्हा सदा, दिव्य लोक उपहार।। पति गिरिधर को मानती, मीरा पावन प्रेम। कृष्ण रंग चुनरी रँगी, भूले सारे नेम।। इकतारा ले हाथ में, धर जोगन का वेश। कृष्णमयी मीरा हुई, भूली अपना देश।। मीरा से अब हो रही ,भक्तिकाल पहचान । प्रेम भक्ति को राह दी,सब करते गुणगान।। गरल सुधा ...
फागुन आया देह में
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फागुन आया देह में

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** फागुन आया देह में, जागी आज उमंग। मन उल्लासित हो गया, फड़क उठा हर अंग।। फागुन लेकर आ गया, प्रीति भरा संदेश। जियरा को जो दे रहा, मिलने का आवेश।। फागुन की अठखेलियाँ, होली का पैग़ाम। हर कोई लिखने लगा, चिठिया प्रिय के नाम।। फागुन की मदहोशियाँ, छेड़ें मीठी तान। हल्का जाड़ा कर रहा, अनुबंधों का मान।। सरसों में आकर्ष है, महुये में है काम। पवन नेह ले कर रहा, कर्म आज अविराम।। फागुन लिए तरंग है, सबकी बदली चाल। मौसम ने ऐसा किया, कुछ तो आज कमाल।। बहके-बहके लोग हैं, संयम रहा न आज। फागुन करने लग गया, हर दिल पर तो राज।। फागुन रंगारंग है, बजें आज तो चंग। संतों के मन भी चढ़ा, साहचर्य का रंग।। यौवन है हर भाव पर, टूटे सारे बंध। है स्वच्छंद मधुमास अब, अवमानित सौगंध।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : ...
मुलाकात तुझसे हुई
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मुलाकात तुझसे हुई

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** मुलाकात तुझसे हुई, मुझको दिन याद। तेरे मिलने ने किया, मुझे सदा आबाद।। करो इरादा प्रेम का, तो मिलता है मीत। जिससे अधरों पर सजे, खुशहाली का गीत।। वादा करना सोचकर, फिर मत देना तोड़। जिसको अपनाना उसे, देना कभी न छोड़।। करो अगर इकरार तुम, फिर मत कर इनकार। यही प्रेम की चेतना, यही प्रेम-आधार।। सोच-समझ ही दो सदा, दिल का तो प्रस्ताव। बात तभी जब अंत तक, रहे प्रेम का ताव।। बंधन हो मजबूत जब, तभी बढ़ेगी शान। करना नित ही प्रेम का, दिल से सब सम्मान।। आया है देखो 'शरद', निकट आज मधुमास। हर दिल में तो पर रहा आज प्रखर विश्वास।। अंधकार को मारकर, देता जो उजियार। कहता है सारा जगत, उसको ही तो प्यार।। प्रेम ईश का रूप है, लगता है दिनमान। जो भावों की श्रेष्ठता, शुभ-मंगल का गान।। रखो हृदय को निष्कलुष, करो सदा नि...
सरोद
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सरोद

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** वादन सुनो सरोद का, सँग है सरगम ताल। मन मयूर जब नाचता, समय बदलता चाल।। वीणा और सरोद सँग, बजता मधुर मृदंग। बजती है जब भैरवी, बिखरें अनुपम रंग।। मंगल काज सँवारते, मधुर सरोद सितार। तोरण सजते द्वार पर, होता मनु सत्कार।। कृपा करें माँ शारदे, हो सरोद की तान। करता कवि फिर है सृजन, गढ़े नये प्रतिमान।। बजने लगता जब मधुर, मन का प्रेम सरोद। छंद गीत कविवर रचे, करता हिय आमोद।। नयनों में रस घोलती, मन में भरे हिलोर। धुन सरोद की भावनी, उर हरती चितचोर।। अनुपम वाद्य सरोद है, छेड़े उर के तार। अति मधुरिम संगीत से, बहे अमिय रसधार।। परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ" निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश) पति : पुरुषोत्तम भट्ट माता : स्व. सुमित्रा पाठक पिता : स्व. हरि मोहन पाठक पुत्र : सौरभ भट्ट पुत्र वधू : ...
महासंत रविदास
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महासंत रविदास

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** महासंत रविदास जी, मानवता के सार। फैलाकर के जो गए, एक नया उजियार।। महासंत रविदास जी, थे समता के रूप। अपने युग को दे गए, जो सूरज की धूप।। हरिपूजा की श्रेष्ठता, धारण करके खूब। रीति-नीति की दे गए, हमको पावन दूब।। महासंत रविदास जी, गाकर के मृदुगीत। बने मनुज की चेतना, के सच्चे मनमीत।। महासंत रविदास जी, कहते थे जयराम। सत्य, कर्म का रच गए, एक नवल आयाम।। महासंत निश्छल रहे, करनी रही विशिष्ट। जीवन सादा, निष्कलुष, सच्चाई थी इष्ट।। दूर रहो हर ढोंग से, दिया हमें संदेश। महासंत ने थे हरे, सबके सब ही क्लेश।। महासंत रविदास जी, थे सच्चे युगबोध। उनकी मानवता बनी, हर युग को नव शोध।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए (इतिहास) (मेरिट होल्डर), एल.एल.बी...
वीर जवान
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वीर जवान

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** खूनी होली खेलते, भारत के ये लाल। लाल रक्त का है तिलक, चमक रहा हर भाल।। पालो मत आतंक को, करे शांति वह भंग। वार कराता पीठ पर, कुटिल शत्रु का ढंग।। आग जले प्रतिशोध की, उर में मेरे राम। नोंचे बोटी शत्रु की, करते काम तमाम।। सूनी माँ की गोद की, आतंकी शैतान । रहना अब तैयार तुम, होना लहू-लुहान।। रूठ गया सिंदूर है, चूड़ी टूटी हाथ । क्रूर युद्ध परिणाम है, बच्चे हुये अनाथ।। खोलो आज त्रिनेत्र तो, दुखी शंभु संसार । भस्म करो अब शत्रु को, हैं धरती पर भार । भारत का कश्मीर है, बदलो अपने ढंग। मृतक अनगिनत देख कर, काँप रहा है अंग।। भारत प्राण प्रतीक है, आजादी का गान। ध्वजा तिरंगा का करें, भारतवासी मान।। गौरव गाथा गाइए, करते हैं कल्याण। भारत माँ के वीर सब, तजें देश हित प्राण।। परिचय :- मीना...
धन्य धरा ये भारती
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धन्य धरा ये भारती

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** धन्य धरा ये भारती, भारत देश महान। स्वर्गिक सुख की खान है, करे विश्व सम्मान।। मुकुट हिमालय देश का, सागर छूता पाँव। पावन गंगा बह रही, है खुशियों की मृदु छाँव।। माटी चंदन देश की, रत्नों की है खान। बरसे कंचन मेघ से, हिन्द है कृषि प्रधान।। मानवता ही धर्म है, समरसता पहचान। सत्य अहिंसा हिन्द की, सकल विश्व प्रतिमान।। राम श्याम से बहुगुणा, अवतारित बलवीर गौरव गाथा गा रहे, मोहक है तस्वीर।। लक्ष्मी अरु दुर्गावती, शासक हुईं महान। दीप शिखा बन देश पर, प्राण किये बलिदान।। गाते गाथा शौर्य की, फौलादी है शान। करते जय वीरांगना, देश करे अभिमान। वीर शहीदों की धरा, गौरवमय इतिहास। बोस तिलक की भूमि का, होता नित्य विकास।। प्रहरी सीमा पर खड़े, रक्षक हैं वो वीर। रखवाली करते सदा, होते नहीं अधीर।। संस्कृति...
साधक परम कबीर
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साधक परम कबीर

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** साधक परम कबीर ने, किया ईश का ध्यान। भक्ति काल के सार में, उनका सृजन महान।। पंचमेल भाषा लिखी,देकर शुद्ध विचार। पृथक अंधविश्वास से,सदगुण सुध आधार।। नदी बहा दी ज्ञान की, करते प्रेम प्रसार। आडंबर से चिर पृथक, उत्तम भाव विचार।। गुरुवर रामानंद से, दीक्षा मिली अपार। साखी रचते प्रेम की, गाता है संसार।। निराकार निर्गुण रहे, पाखंडों से दूर। सच्चाई की सीख दी, गहन ज्ञान भरपूर।। शब्द-तीर लेकर चले, जग में सतत कबीर। भेद-भाव को रोकते, संग भाव गम्भीर।। अनपढ़ थे ज्ञानी बड़े, अद्भुत सर्जक संत। तत्व ज्ञान मर्मज्ञ थे, दास कबीर अनंत।। हृदय भी गम्भीर हुआ, पाकर भाव सुधीर। रचना दास कबीर की, व्यक्त करे जग पीर।। लोक सुधारक थे बड़े,करते थे उद्धार। दुर्लभ नैतिक ज्ञान दे,किया सहज उपकार।। अनुपम थे सारे सृजन,वा...
भारत की हिय वासिनी – प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त रचना
छंद, दोहा

भारत की हिय वासिनी – प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त रचना

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त रचना भारत की हिय वासिनी, हिन्दुस्तान की शान। हिन्दी के आँचल तले, अर्जित उत्तम ज्ञान।। अक्षर -अक्षर कर रहा, सतत राष्ट्र उत्थान। हिन्दी माता हिन्द की, भारत का अभिमान।। हिन्दी में साहित्य है, माँ का गौरव भाल। छन्द गीत देते सदा, सुभग सुधा शुचि चाल।। अलग -अलग भाषा करें, हिन्दी से मृदु योग। एक सूत्र में बाँधती, भिन्न प्रान्त के लोग।। भाते मन को हैं सदा, हिंदी कविता गीत। सरस प्यार के बोल से, लेती मन को जीत।। पूर्ण राष्ट्रभाषा बने, मिलकर लो संज्ञान। हिन्दी के उत्थान का, लक्ष्य सभी लो ठान।। परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" निवासी : ग्वालियर (मध्यप्रदेश) रुचि : गद्य/पद्म लेखन एवं गाय...
हिन्दी में ही वेद है – प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त रचना
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हिन्दी में ही वेद है – प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त रचना

आशा जाकड़ 'आस' इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त रचना हिन्दी में ही वेद है, हिन्दी होत पुराण। हिन्दी में उपनिषद हैं, हिन्दी में कल्याण।। हिन्दी बोलो प्रेम से, कान में शहद घोल । पीड़ा दूर मिटा सके, इसका तोल न मोल।। हिन्दी भाषा हृदय की, हिन्दी हिन्दुस्तान। भाषा है सर्व जन की, हिन्दी पर अभिमान।। हिन्दी सबको जोड़ती, हिन्दी देश महान। अतीत के पन्ने लिखे, हिन्दी बसते प्राण।। हिन्दी बोली सरल है, मस्तक की ये शान । भारत भाल की बिन्दी, हिन्दी बढ़ाये मान।। विरह की पीड़ा लिखती, मिलन की मधुर तान। शौर्य की गाथा बरसे, वीर का स्वाभिमान।। परिचय :- आशा जाकड़ (शिक्षिका, साहित्यकार एवं समाजसेविका) शिक्षा - एम.ए. हिन्दी समाज शास्त्र बी.एड. जन्म स्थान - शिकोहाबाद (आगरा) निवासी - इंदौर (मध्य...
महारानी लक्ष्मीबाई
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महारानी लक्ष्मीबाई

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** लक्ष्मीबाई नाम था, वीरों की थी वीर। राज्यहरण उसका हुआ, तो चमकी शमशीर।। ब्रिटिश हुक़ूमत से भिड़ी, रक्षित करने राज। नमन आज तो कर रहा, देखो सकल समाज।। शौर्यवान रानी प्रखर, जिसका मनु था नाम। उसके कारण ही बना, झाँसी पावनधाम।। स्वाभिमान को धारकर, छेड़ दिया संग्राम। झाँसी दे सकती नहीं, हो कुछ भी अंज़ाम।। रानी-साहस देखकर, घबराये अंग्रेज़। यहाँ-वहाँ भागे सभी, लखकर रानी तेज।। घोड़े पर चढ़ भिड़ गई, चली प्रखर तलवार। दुश्मन मारे अनगिनत, किए वार पर वार।। पर दुश्मन बहुसंख्य था, कैसे पाती पार। गति वीरों वाली हुई, करो सभी जयकार।। मर्दानी थी लौहसम, अमर हुआ इतिहास। लक्ष्मीबाई को मिली, जगह दिलों में ख़ास।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए (इतिहास...
मर्यादा की महत्ता
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मर्यादा की महत्ता

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** मर्यादा से मान है, मिलता है उत्थान। मिले सफलता हर कदम, हों पूरे अरमान।। मर्यादा से शान है, रहे सुरक्षित आन। मर्यादा को जो रखें, वे बनते बलवान।। मर्यादा से गति मिले, फैले नित उजियार। मर्यादा रहती सदा, बनकर जीवनसार।। मर्यादा है चेतना, जाग्रत करे विवेक। मर्यादा से पल्लवित, सदा इरादे नेक।। मर्यादा को साधता, वह हो जाता ख़ास। कभी न उसकी टूटती, पलने वाली आस।। मर्यादा में रीति है, जिससे निभती लाज। कर सकते इससे सदा, सबके दिल पर राज।। मर्यादा में देव हैं, बसे हुए भगवान। मर्यादा का विश्व में, होता है यशगान।। मर्यादा संस्कार है, अनुशासन का रूप। जिससे मिलती ताज़गी, और सुहानी धूप।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए (इतिहास) (मेरिट होल्डर), ए...
सत्य की राह
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सत्य की राह

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** सत्य साधकर गति करो, तब ही बनो महान। केवल सच से ही बने, इंसाँ नित बलवान।। सत्य चेतना को रखे, जिसमें रहे विवेक। रीति-नीति को साध ले, रखकर इच्छा नेक।। सत्य बड़ा गुण जान ले, इसका हो विस्तार। जीवन में खिलते सुमन, बनकर के उपहार।। सत्य सदा ही जीतता, गाता मंगल गीत। इसको हम अब लें बना, अपने मन का गीत।। सत्य सदा हित साधता, लाता है उत्थान। जो चलता सद राह पर, सदा पूर्ण अरमान।। सत्य धर्म का रूप है, जिसमें हैं भगवान। सच के पथ पर जो चले, उसका हो यशगान।। सत्य दमकता सूर्य-सा, देता जो आलोक। जिससे होता दूर नित, जीवन का हर शोक।। सत्य सुहाता है जिसे, उसकी हो जयकार। कभी सत्य हारे नहीं, होकर के लाचार।। सत्य एक है साधना, साधक हरदम वीर। वक़्त संग परिणाम है, देखो बनकर धीर।। सत्य सनातन मान्यता, सत्य बड़ा इक युद्...
प्रकृति का मौन संदेश
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प्रकृति का मौन संदेश

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** बहुत हुई इस बार तो, मानसून की मार। इंसानों की बस्तियाँ, गईं आज हैं हार।। दिया प्रकृति ने देश को, चोखा इक संदेश। छेड़-छाड़ हो प्रकृति से, तो भोगो आवेश।। बिगड़े किंचित संतुलन, तो होगा आघात। मौन संदेशा प्रकृति का, सौंप रहा जज़्बात।। मानसून की मार का, रहा न कोई छोर। घबराये इंसान सब, पीड़ित हैं घनघोर।। मानसून की मार से, देखो हाहाकार। मेघों ने बेहद किया, हम पर अत्याचार।। मानसून की मार का, व्यापक है आवेग। क्रोधित होकर काल ने, मारी तीखी तेग।। कौन करेगा आज तो, हम सब पर उपकार। मानसून की मार ने, किया हमें लाचार।। हे!ईश्वर तुम रुष्ट हो, हम सबका अपराध। मौन आपकी बात को, किंचित सके न साध।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए (इतिहास) (मेरिट होल...
हिंदी
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हिंदी

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** कोमल है कमनीय भी, शुभ्र भाव रसखान। यशवर्धक मन मोहिनी, हिन्दी सरल सुजान।। भाग्यविधाता देश की, संस्कृति की पहचान देवनागरी लिपि बनी, सकल विश्व की जान।। अधिशासी भाषा मधुर, दिव्य व्याकरण ज्ञान। सागर सी है भव्यता, निर्मल शीतल जान।। सम्मोहित मन को करे, नित गढ़ती प्रतिमान। पावन है यह गंग-सी, माॅंग रही उत्थान।। आलोकित जग को किया, सुंदर हैं उपमान। अलख जगाती प्रेम का, नित्य बढ़ाती शान।। उच्चारण भी शुद्ध है, वंशी की मृदु तान। सद्भावों का सार है, श्रम का है प्रतिदान।। पुष्पों की मकरन्द है, शुभकर्मों की खान। भारत की है अस्मिता, शुभदा का वरदान।। पुत्री संस्कृत वाग्मयी, लौकिक सुधा समान। स्वर प्रवाह है व्यंजना, माँ का स्वर संधान।। दोहा चौपाई लिखें, तुलसी से विद्वान। इसकी शक्ति अपार पर, करते हम अभिम...
गुरु महिमा (दोहे)
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गुरु महिमा (दोहे)

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** गुरु ओजस्वी दीप है, तेज है चहुं ओर। अपने अनगढ़ शिष्य का, सृजन करें हर छौर। विद्यास्थली मंदिर है, गुरु मेरे भगवान। करता नित मैं वंदना, हृदय बसे सम्मान। अभिनन्दन गुरु देव का, है सादर सत्कार। अनुग्रह मिलें शिष्य को, करते नित उपकार। नित गुरु शिष्य भला करे, नव चरित्र सृजनकार। संस्कार की विशेषता, नव वृत्तिक मूर्तिकार। गुरु विशेष की खान है, गुरु कोमल अहसास। गुरु अज्ञान विनाशक है, गुरु नायक विश्वास। गुरु संस्कृति की रोशनी, गुरु विशेषण विशाल। सद् गुरु सा सगा नहीं, गुरु अनमोल मिशाल। गुरु सहज सरल जीवनी, गुरु जग तारणहार। गुरु संबल है शिष्य के, गुरु नव पालनहार। गुरु वितान नव ज्ञान के, गुरु पावन परिवेश। गुरु ओज चरित्र भव्य है, आप मूर्ति अनिमेश। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार...
भाई-बहन का प्यार
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भाई-बहन का प्यार

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** राखी की फैली महक, बँध जाने के बाद। रक्षा की थी बात जो, फिर से वह आबाद।। नेहभाव पुलकित हुए, पुष्पित है अनुराग। टीका, रोली, आरती, सचमुच में बेदाग।। मीलों चलकर आ गया, इक पल में तो पर्व। संस्कार मुस्का रहे, मूल्य कर रहे गर्व।। अनुबंधों में हैं बँधे, रिश्तों के आयाम। मानो तो बस हैं यहीं, पूरे चारों धाम।। सावन तो रिमझिम झरे, बाँट रहा अहसास। बहना आ पाई नहीं, भैया हुआ उदास।। एक लिफाफा बन गया, आज हर्ष-उल्लास। आएगा कब डाकिया, टूट रही है आस।। भागदौड़ बस है बची, केवल सुबहोशाम। धागे ने सबको दिया, नवल एक पैग़ाम।। खुशियों के पर्चे बँटे, ले धागों का नाम। बचपन है अब तो युवा, यादें करें सलाम।। दीप जला अपनत्व का, सम्बंधों के नेग। भावों का अर्पण "शरद", आशीषों का वेग।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म...
श्रीकृष्णावतार
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श्रीकृष्णावतार

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** कृष्ण जन्मदिन मांगलिक, एक सुखद उपहार। बिखरा सारे विश्व में, गहन सत्य का सार।। कृष्ण जन्म दिन दे खुशी, सौंपे हमको धर्म। देवपुरुष सिखला गए, करना सबको कर्म।। कृष्ण जन्मदिन रच रहा, गोकुल में उल्लास। जिसने सबको सीख दी, रखना हर पल आस।। कृष्ण जन्मदिन सत्य का, बना एक उद्घोष। कंस हनन कर हर लिया, कान्हा ने सब दोष।। कृष्ण जन्मदिन कह रहा, चलो सत्य की राह। नहीं धर्मच्युत हो कभी, तभी बनोगे शाह।। कृष्ण जन्मदिन मति रचे, देता व्यापक न्याय। है दुष्टों पर वार जो, रचे नवल अध्याय।। कृष्ण जन्मदिन पूज्य है, वंदन का है पाठ। बालरूप में चेतना, निश्छल मन का ठाठ।। कृष्ण जन्मदिन रच रहा, राधाजी से नेह। अंतर का आवेग बस, दूर सदा ही देह।। कृष्ण जन्मदिन सदफलित, गीता का नव सार। उजियारे की वंदना, अँधियारे की हार।। कृष्ण ...
सावन
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सावन

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** सावन उमड़ी बादली, बरस रही घनघोर। कोयल कजरी गा रही, नाच रहे वन मोर। रिमझिम पड़ी फुहार से, हुई सुनहरी भोर। खुशियों की बरसात में, हलधर करता शोर। तीज त्यौहार बादली, सावन की बरसात। मेघ चमकती बीजुरी, हरित अमावस रात। काली घटा गगन चढ़ी, गरज गरज कर घोर। सतरंगी सा लहरिया, इंद्र धनुष का छोर। मेघ मल्लिका रूपसी, सजती सौ सौ बार। हरी चुनरिया ओढ़कर, धरा करे श्रृंगार। चातक श्यामा झूलते, मदन तरु की शाख। मीठी टेर दादुर की, पपिया प्यारी वाख। मादक यौवन हरितिमा, निर्मल बहता नीर। हुआ सुगंधित मलयगिरि, शीतल मंद समीर। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। ...
नागपंचमी
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नागपंचमी

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** नागपंचमी पर्व का, सुंदर बहुत विधान। संस्कारों की देह में, नैतिकता के प्रान।। नाग पूजकर पुण्य ले, खुश होते हैं ईश। मिले प्रकृति का साथ नित, मिलता है आशीष।। नाग जीव सादा-सरल, जीने का अधिकार। जब तक छेड़ो मत उसे, देता नहिं फुंफकार।। दूध पिला पूजन करो, वंदित हो अब नाग। सब जीवों से हम रखें, नित चोखा अनुराग।। पान-बेल का मान कर, चौरसिया दिन ख़ास। गहो पान उपयोगिता, ले चोखे अहसास।। बीन बजे मौसम बने, खुश होता परिवेश। नाग-कृपा से नित रहे, परे सतत् ग़म, क्लेश।। हलुआ-पूरी कर ग्रहण, गाओ मंगल गीत। नागपंचमी आपको, देती है नित जीत।। हिन्दू का तो पर्व यह, रखता बहुत विवेक। पूजन को अब साधकर, बने मनुज तुम नेक।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए (इतिह...
दुर्योधन का हास
दोहा

दुर्योधन का हास

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** हुआ महाभारत तभी, वजह बहुत थी खास। द्रुपदसुता ने था किया, दुर्योधन का हास।। कभी न करना और का, तुम किंचित उपहास। वजह बनेगी हो कलह, टूटेगा विश्वास।। दुर्योधन का अति कपट, झगड़ा लाया ख़ूब। वजह यही थी युद्ध की, सूखी नेहिल दूब।। पाप वजह बनता सदा, रच देता संताप। अन्यायी आवेग को, कौन सकेगा माप।। रीति, नीति से गति मिले, बनते ये शुभ नेग। झूठ बने नित ही वजह, चले युद्ध की तेग।। किया शकुनि ने छल बहुत, हुआ इसलिए युद्ध। यही वजह टकराव की, हुए कृष्ण भी क्रुद्ध।। झूठ वजह अवसान की, अपनाओ नित साँच। जो सत् के पथ नित चलें, उन पर कभी न आँच।। नित अधर्म बनकर वजह, रच देता है शोक। इसीलिए तो धर्म नित, देता हमको देता रोक।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए ...
हरदम पिता महान
दोहा

हरदम पिता महान

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** हिमगिरि जैसे भव्य हैं, रहते सीना तान। वेदों ने भी तो कहा, हरदम पिता महान।। पिता उच्च आकाश से, संतानों के ईश। जब तक जीवित हैं पिता, कभी न झुकता शीश।। सुख-दुख में अविचल रहें, आँसू का है त्याग। जेब भरी खाली रहे, पर हाँ से अनुराग।। पिता रूप संघर्ष का, संरक्षक का वेग। कैसे भी हालात हों, पिता मांगलिक नेग।। बुरी नज़र पर मार हैं, हर संकट पर वार। पिता दिवाकर से लगें, फैलाते उजियार।। नेह भरे रहते पिता, दिखते सदा कठोर। संतानों का भाग्य है, नाचे मन का मोर।। पिता सुरीला राग हैं, भजन, आरती गान। जब तक जीवित हैं पिता, संतानों में जान।। एक दिवस केवल नहीं, युगों-युगों सम्मान। पिता करें संतान के, पूरे सब अरमान।। पिता प्रेम का नाम है, पिता नाम कर्तव्य। सकल जगत में आज तो, पितु गाथा है श्रव्य।। पितु को खोना...
ससुराल के बीते दिन
दोहा, हास्य

ससुराल के बीते दिन

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** स्वर्णिम युग ससुराल का, याद करे दामाद। पर अब कुछ भी है नहीं, केवल है अवसाद।। ख़ातिरदारी है नहीं, अब सूना मैदान। बिलख रहे दामाद जी, रुतबे का अवसान।। स्वर्णिम युग पहले रहा, खाते थे पकवान। अब तो सारे मिटे गए, ससुराली अरमान।। कितना प्यारी थी कभी, जिनको तो ससुराल। उनको दुख अब सालता, अब वह गुज़रा काल।। अब ख़ातिरदारी नहीं, शेष बची है याद। अब मुरझाने लगे गया, पौधा तो बिन खाद।। स्वर्णिम युग ससुराल का, केवल है इतिहास। दर्द घिरे दामाद जी, जीते अब बिन आस।। पहले हलुआ, पूड़ियाँ, रबड़ी, काजू, खीर। अब तो केवल हाथ है, कसक, कष्ट सँग पीर।। स्वर्णिम युग ससुराल का, शायद आता लौट। जैसा पहले दौर था, वैसा हो फिर हौट।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए ...