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समीक्षा

होमबाउंड – फिल्म समीक्षा
फिल्म

होमबाउंड – फिल्म समीक्षा

नील मणि मवाना रोड (मेरठ) ******************** प्लेटफॉर्म पर परीक्षार्थियों की खचाखच भीड़ - रेलगाड़ी में चढ़ने के लिए मारामारी - परीक्षा केंद्र तक पहुंचना ही पहली लड़ाई है- परीक्षा हो भी जाए तो उसके बाद परिणाम के लिए सालों तक इंतजार करना- हुनर की कद्र नहीं है; जातीय भेदभाव हावी है। गफलत भरा बीतता समय बहुत सुंदरता से दिखाया है; परिणाम में भी जातिगत भेदभाव; तीर से चुभने वाले डायलॉग सशक्त समसामयिक, सहज, मार्मिक पीड़ा व अपमान को दर्शाते दृश्य आपको सीट से चिपके रहने को विवश करते हैं। हुनर की कद्र नहीं है; जातीय भेदभाव हावी है। खपरैल के गडढों में से आसमान देखना आसान नहीं, जितना ईंटा गारा डाल खुद को खड़ा करते हैं- लोग दूसरी तरफ से धक्का मार कर गिरा देते हैं। गेंद का असली वजूद हवा में ही है दोस्त, जमीन पर तो बस पड़ी ही रहती है- खुद की कद्र करना स्वार्थ नहीं होता एक दूसरे को चाहने का मतलब यह...
भूलन द मेज़ : फिल्म समीक्षा
फिल्म

भूलन द मेज़ : फिल्म समीक्षा

उत्कर्ष सोनबोइर खुर्सीपार भिलाई ******************** मुझे इस छत्तीसगढ़ी फिल्म का, बहुत दिनों से इंतजार था, २७ मई को रिलीज़ होनें के बाद, मुझे इस फिल्म को देखने की उत्सुकता और भी बढ़ गई, हां और मेरें परीक्षा होतें ही मैंने भिलाई के मुक्ता सिनेमा में देख ही लिया। भूलन द मेज़, पहली ऐसी छत्तीसगढ़ी फिल्म है जो राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए नामित हुई और गत वर्ष उपराष्ट्रपति, श्री एम वेंकैया नायडू जी के कर कमलों द्वारा भूलन द मेज़ को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाज़ा भी गया। छत्तीसगढ़ नई फिल्म नीति के तहत इस फिल्म को एक करोड़ रूपये का अनुदान राशि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दिया जाएगा। यह फिल्म संजीव बख्शी के उपन्यास 'भूलन कांदा' पर आधारित है, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी वरिष्ठ निबंधकार के सानिध्य और दादी की दुलार ने उन्हें लेखक बनने प्रेरित किया, मैं तो कहूंगा की उन्हें साहित्य प्रेम विरासत में मिली थी।...
ज़िंदगी बदल देगी यह पुस्तक : ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा
साहित्य

ज़िंदगी बदल देगी यह पुस्तक : ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा

पुस्तक : ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा लेखक : शिखर चंद जैन मूल्य : २५० रुपये प्रकाशक : प्रखर गूँज प्रकाशन,दिल्ली समीक्षक : कुमार संदीप ज़िंदगी में कई ऐसे मोड़ आते हैं जब हम ज़िंदगी से मिले दर्द व तकलीफ़ से पूरी तरह टूट जाते हैं, निराश हो जाते हैं। उस वक्त हमें सबसे बड़ी ज़रूरत होती है साहस की धैर्य की। इस अवस्था में यदि हमें एक ऐसी पुस्तक यदि पढ़ने को मिल जाए जो हमारे अंदर अथाह साहस का संचार कर दे तो फिर ज़िंदगी सार्थक हो जाती है। जी हाँ, एक अच्छी पु्स्तक न केवल पढ़ने में ही अच्छी लगती है अपितु आपकी ज़िंदगी बदलने की शक्ति भी रखती है।आपने सुना भी होगा कि अन्ना हजारे एक बार आत्महत्या करने जा रहे थे,इस बीच उन्होंने एक किताब पढ़ ली और अपने उस निर्णय को सदा सर्वदा के लिए त्याग दिया। ऐसी ही प्रेरणादायक व रग-रग में कुछ अलग करने की चाह जागृत करने वाली पुस्तक है "ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा"। इस पुस्तक में लिखित हर आ...
अनसुलझे प्रश्न पर समीक्षा : अरुण कुमार जैन
साहित्य

अनसुलझे प्रश्न पर समीक्षा : अरुण कुमार जैन

अरुण कुमार जैन वरिष्ठ एवं प्रसिद्ध साहित्यकार की लेखनी द्वारा की गयी 'अनसुलझे प्रश्न' लेखिका शरद सिंह पर समीक्षा कृति : अनसुलझे प्रश्न लेखिका : सुश्री शरद सिंह प्रकाशक : प्रतिष्ठा फिल्म एन्ड मीडिया , लखनऊ पृष्ठ : ९६ पेपर बैक संस्करण प्रथम संस्करण २०१९ "अनसुलझे प्रश्न" सुश्री शरद सिंह का उपन्यास व कुछ लोक कथाओं का संकलन है। ९६ पृष्ठों की इस कृति मे भावना, संवेदना, आशा, निराशा, हताशा विश्वास, मैत्री, निश्छल प्रेम, उमंग व सुन्दर भाषाभिब्यक्ति का संसार समाया है। कृति की मुख्य रचना अनसुलझे प्रश्न है। यह एक ऐसी नारी की कहानी है जो सक्षम होते हुए भीकदम कदम पर ठोकरे खाती है व अन्त मे मृत्यु का वरण कर लेती है। कृति दुखान्त है। इसमे झाकती पीडा़ बेबसी, संकोच बहुत कुछ ब्यक्त करता है। विद्यालय जाती छोटी बेटी, किशोर अवस्था का प्रेम, मार्मिक संवेदनाऐ फिर यथार्थ के धरातल पर विपन्नता के कारण बेमेल विवाह स...
अंकिता ने किया लगातार ६० मिनिट नृत्य
गुण श्रेष्ठता, संगीत

अंकिता ने किया लगातार ६० मिनिट नृत्य

भवानीमंडी। देश की कत्थक नृत्य की उभरती नृत्यांगना अंकिता वाजपेयी ने २९ अप्रैल विश्व नृत्य दिवस के अवसर पर घर पर ही शाम ७ से ८ बजे (६० मिनट) तक लगातार बिना रूके कोरोना जागरूकता व कोरोना वॉरियर्स के सम्मान में फेसबुक लाइव पर नृत्य प्रस्तुति दी। चेहरे पर वही ताजगी रही। अंकिता वाजपेयी ने नृत्य प्रस्तुति से पूर्व कहा कि सारे देश को कहना है सबको घर पर रहना है, करो नमस्ते, मोदी जी हमारे, जीतेगा इंडिया, घर पर ही रहो ना, कोरोना से डरो ना, देश अपना होगा प्रकाशवान, मैं देश नहीं मिटने दूँगा, ये मत कहो खुदा से, कोरोना फैल जाता हैं जैसे अनेक कोरोना जागरूकता गीतो पर नृत्य प्रस्तुति दी।   आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर मेल कीजिये मेल...
साहित्य

मूर्खमेव जयते युगे युगे

राजेश कुमार शर्मा "पुरोहित" भवानीमंडी (राज.) ******************** पुस्तक समीक्षा कृति :- मूर्खमेव जयते युगे युगे लेखक :- विनोद कुमार विक्की प्रकाशक :- दिल्ली पुस्तक सदन शाहदरा,नई दिल्ली पृष्ठ:-११९ संस्करण :- प्रथम २०२० समीक्षक :- राजेश कुमार शर्मा "पुरोहित" देश के ख्यातिनाम व्यंग्यकार विनोद कुमार विक्की अपनी पैनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं। प्रस्तुत व्यंग्य कृति मूर्खमेव जयते युगे युगे के सारे लेख सामाजिक विसंगतियों व जीवन की विभिन्न समस्याओं से जुड़े हैं। राजनीति शिक्षा साहित्य जगत में सामयिक हलचल की पोल खोलते हैं। इस कृति का पहला व्यंग्य तेरी मेरी भौं भौं से लेकर अंतिम व्यंग्य स्वेदशी दीपावली तक पढ़ने से मेरे मस्तिष्क में सहसा आया कि आज का इंसान इतनी भागदौड़ करता है फिर भी उसके जीवन मे शांति नहीं है। आदमी क्या क्या जुगाड़ नहीं करता है। तेरी भौं भौं मेरी म्याऊं में नेताओ के झूंठे वादे ...
पुस्तक समीक्षा, साहित्य

कोमल किसलय (काव्य संग्रह) : पुस्तक समीक्षा

राजेश कुमार शर्मा "पुरोहित" भवानीमंडी (राज.) ******************** पुस्तक समीक्षा कृति :- कोमल किसलय (काव्य संग्रह) लेखक :- ग्यारसीलाल सेन प्रकाशक :- सुधाकर साहित्य समिति, झालावाड़ (राजस्थान) मूल्य :-१२५/- पृष्ठ :- ८९ समीक्षक :- राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित" झालावाड़ राजस्थान के वरिष्ठ कवि एवम साहित्यकार विचारक, चिंतक ग्यारसीलाल सेन ख्यातिनाम लेखक है। आपने अपनी काव्य कृतियों से राष्ट्र में अलग ही पहचान बनाई है। नवोदित कवियों के आप प्रेरणा स्रोत हैं। प्रस्तुत कृति कोमल किसलय काव्य संग्रह उनके पिता श्री किशनलाल जी व माता केशर देवी को समर्पित कृति है। मुखावरण बहुत सुन्दर है। सेन के ट्रेवल पिक्चर्स, अभिव्यक्ति का आत्मदान, आदि निबन्ध संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। आपकी रचनाएँ राष्ट्र की पत्र पत्रिकाओं में नियमित छपती है। प्रस्तुत कृति की भूमिका देश के सुप्रसिद्ध कवि बालकवि बैरागी जी ने लिखी है ज...
कबीर सिंह
फिल्म

कबीर सिंह

=================================== रचयिता : शिवांकित तिवारी "शिवा" फिल्म की वास्तविक कहानी:-शुरुआत से फिल्म एक सीन के साथ शुरू होती है जहां एक आदमी और औरत बिस्तर पर सो रहे हैं और पीछे से समुद्र की तेज़ लहरों की आवाज़ आ रही है। इन्हीं लहरों की आवाज़ के साथ हम कबीर सिंह की तूफानी ज़िंदगी में एंट्री लेते हैं। वो एक मेडिकल सर्जन है और फुटबॉल चैंपियन है। लेकिन अंदर ही अंदर कई समस्याओं से घुट रहा है जिनमें बेतहाशा गुस्सा एक है। कबीर सिंह की नज़रें जैसे ही प्रीति (कियारा आडवाणी) पर पड़ती हैं, वो बागी बन जाता है , ऐसा बागी जिसके पास अब एक मक़सद भी है। एक शरमाई सी सहमी सी लड़की, प्रीति भी कबीर को अपने दिल की बात बताती है लेकिन उनका रिश्ता ज़्यादा दिन तक नहीं चलता है। इसके बाद कबीर खुद को तबाही के रास्ते पर ले चलता है। शराब, नशा और सेक्स, हर चीज़ उसे उसके दुख से दूर ले जाने की कोशिश...