
संजय जैन
मुंबई
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विधा : गीत भजन
तर्ज : (हम मेहनत कस इस दुनिया से अपना …..)
श्री आदिनाथ की भक्ति को
श्रुत धाम हम जाएंगे।
एक बार नही सौ बार नहीं
हम जीवन भर जाएंगे।
हम आदिनाथ की……।।
माया के चक्कर में पड़कर
अपना जीवन तू गवा रहा।
और झूठ फरेब करके तू
दौलत बहुत कमा रहा।
ये दौलत साथ न जायेगे
जिस दिन तू मर जायेगा।
तब तुझे बड़े बाबा याद आएंगे
पर तेरा सब कुछ मिट जाएगा।।
श्री आदिनाथ की भक्ति को
श्रुत धाम हम जाएंगे।
एक बार नही सौ बार नहीं
हम जीवन भर जाएंगे।
हम आदिनाथ की……।।
क्यों अपने मनुष्य जीवन को
तू युही गंवा रहा।
मिला है तुझे मनुष्य जीवन तो
कुछ दया धर्म भी करता जा।
यही सब तेरे साथ में जाने वाला है
तो तू क्यों इसे गंवा रहा।।
श्री आदिनाथ की भक्ति को
श्रुत धाम हम जाएंगे।
एक बार नही सौ बार नहीं
हम जीवन भर जाएंगे।
श्री आदिनाथ की……।।
परिचय :- बीना (मध्यप्रदेश) के निवासी संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं। करीब २५ वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच (hindirakshak.com) सहित बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं। ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों पर भी दिखा चुके हैं। इसी के चलते कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें सम्मानित किया जा चुका है। आप मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखने के साथ – साथ मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है, आप लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।
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