
पर्यावरण दिवस
रचयिता : मनोरमा जोशी
हरे भरे उपवन का बन जाये,
हर घटक राष्ट्र का माली।
क्लेश काल का बने ग्रास नित,
काल निशा हो कभी न काली।
लेकर के संकल्प आज हम,
ऐक ऐक पेड़ लगाएं,
पर्यावरण बचाएं।
वन जब घटा हैं बड़ा है प्रदूषण,
जन जन में फैली है बीमारी भीषण।
यह संताप मिटाएं।
आओ ऐक पेड़ लगाएं।
पर्यावरण बिन सूना जग सारा,
इसी से है जीवन सारा,
इससें ही हैं सब गतिमान,
हम सब रक्खे इसका ध्यान ,
स्वस्थय सुखी संसार बसायें।
आओ हम एक पेड़ लगायें।
अपना देश बचायें।
लेखिका का परिचय :- श्रीमती मनोरमा जोशी का निवास मध्यप्रदेश के इंदौर में है। आपका साहित्यिक उपनाम ‘मनु’ है। आपकी जन्मतिथि १९ दिसम्बर १९५३ और जन्मस्थान नरसिंहगढ़ है। शिक्षा-स्नातकोत्तर और संगीत है। कार्यक्षेत्र-सामाजिक क्षेत्र-इन्दौर शहर ही है। लेखन विधा में कविता और लेख लिखती हैं।विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी लेखनी का प्रकाशन होता रहा है। राष्ट्रीय कीर्ति सम्मान सहित साहित्य शिरोमणि सम्मान और सुशीला देवी सम्मान प्रमुख रुप से आपको मिले हैं। उपलब्धि संगीत शिक्षक,मालवी नाटक में अभिनय और समाजसेवा करना है। आपके लेखन का उद्देश्य-हिंदी का प्रचार-प्रसार और जन कल्याण है। कार्यक्षेत्र इंदौर शहर है। आप सामाजिक क्षेत्र में विविध गतिविधियों में सक्रिय रहती हैं। एक काव्य संग्रह में आपकी रचना प्रकाशित हुई है।
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