
प्रो. आर.एन. सिंह ‘साहिल’
जौनपुर (उत्तर प्रदेश)
********************
स्वस्थ रहें सानंद रहें मित्रों को बहुत बधाई है
मिलें सुमित्र भाग्य जग जाए वरना बहुत हंसाई है
पावन भारत में मिलते हैं मित्रों के प्रतिमान बहुत
एक बार भी ध्यान जो कर ले आ जाती अंगड़ाई है
दे अवलम्ब सुग्रीव को राम ने मानक निर्मित नया किया
राज मुकुट विभीषण के सिर मित्रता ख़ूब निभाई है
कृष्ण सुदामा जैसी मित्रता दुनिया में दुर्लभ अब भी
गले लगाया कृष्ण ने उनको तो दुनिया हर्षाई है
वज्र अस्त्र निर्मित करने को अस्थि दान कर दिये दधीचि
नष्ट हुई असुरों की सेना धर्म ध्वजा लहराई है
भाग्योदय मित्रों से होता और ख़ुशी की बारिश भी
मित्र शक्ति संवर्धक भी है मित्रों से तरुणाई है
नहीं मिलेगा त्रय लोकों में मित्रों सा साहिल कोई
मित्रों संग धोखा फ़रेब की नामुमकिन भरपाई है
परिचय :- प्रोफ़ेसर आर.एन. सिंह ‘साहिल’
निवासी : जौनपुर उत्तर प्रदेश
सम्प्रति : मनोविज्ञान विभाग काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
रुचि : पुस्तक लेखन, सम्पादन, कविता, ग़ज़ल, १०० शोध पत्र प्रकाशित, मनोविज्ञान पर १२ पुस्तकें प्रकाशित, ११ काव्य संग्रह सम्पादित, अध्यक्ष साहित्यिक संस्था जौनपुर उत्तर प्रदेश
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻
आपको यह रचना अच्छी लगे तो साझा अवश्य कीजिये और पढते रहे hindirakshak.com राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच से जुड़ने व कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने चलभाष पर प्राप्त करने हेतु राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच की इस लिंक को खोलें और लाइक करें 👉 hindi rakshak manch 👈… राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु अपने चलभाष पर पहले हमारा चलभाष क्रमांक ९८२७३ ६०३६० सुरक्षित कर लें फिर उस पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻.
