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माला

सुरेखा सुनील दत्त शर्मा
बेगम बाग (मेरठ)

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पिरोया एक एक शब्द तो कविता बन गई
एहसास और जज्बात की माला बन गई

धागा था इस कदर मजबूत की पक्की हो गई
रिश्ते और अरमानों की हमजोली बन गई

मजबूती मेरे प्यार की इसमें गण गई
बिखरे शब्दों को पीरोकर एक पंक्ति बन गई

मेरे विश्वास को रखकर तराजू में जो तोला
समेटकर शब्दों को गूथकर जज्बातों को वजनदार बन गई

पीरो या एक एक शब्द तो माला बन गई
इश्क की एक मजबूत सी कविता बन गई

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परिचय :-  सुरेखा “सुनील “दत्त शर्मा
साहित्यिक : उपनाम नेहा पंडित
जन्मतिथि : ३१ अगस्त
जन्म स्थान : मथुरा
निवासी : बेगम बाग मेरठ
साहित्य लेखन विधाएं : स्वतंत्र लेखन, कहानी, कविता, शायरी, उपन्यास
प्रकाशित साहित्य : जिनमें कहानी और रचनाएं प्रकाशित हुई है :-
पर्यावरण प्रहरी मेरठ, हिमालिनी नेपाल,हिंदी रक्षक मंच (hindirakshak.com) इंदौर, कवि कुंभ देहरादून, सौरभ मेरठ, काव्य तरंगिणी मुंबई, दैनिक जागरण अखबार, अमर उजाला अखबार, सौराष्ट्र भारत न्यूज़ पेपर मुंबई,  कहानी संग्रह, काव्य संग्रह
सम्मान : हिंदी रक्षक मंच इंदौर (hindirakshak.com) द्वारा हिन्दी रक्षक २०२० सम्मान एवं काव्य भूषण सम्मान मुंबई, वरिष्ठ समाजसेवी सम्मान मेरठ, क्रांति धरा साहित्य रत्न सम्मान, पर्यावरण प्रहरी सम्मान
संप्रति : सचिव ग्रीन केयर सोसायटी, सचिव बीइंग वूमेन मेरठ मंडल


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